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प्यार और जिंदगी

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सोशल मीडिया: गिलोटिन होते सपने

अमर उजाला, काव्य डेस्क, नई दिल्ली

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स्वप्न दुनियादार नहीं होते-
कल्पनाएं निर्मम नहीं हुआ करतीं,
अन्यथा सत्य की वेदी पर 
बलि नहीं चढ़ा करतीं।
अन्यथा कभी नहीं होता कि
सत्य दु:स्वप्न हो जाता।

एक उम्र पार करती
आकांक्षाओं के भग्नावशेष बनने तक,
कब धुंधला जाते हैं खुली आंखों के दिवास्वप्न
उजाले को खबर नहीं होती। आगे पढ़ें

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