स्वरांगी साने
कविता का समकाल: परिवार और संबंधों का पुनर्वास (संवाद और पाठ), जैसा विषय दिखने में जितना कठिन लग रहा था, वक्ताओं ने उसे उतना ही सरल बना दिया था। रबीन्द्रनाथ टैगोर विश्वविद्यालय द्वारा वैश्विक स्तर पर आयोजित किए जा रहे टैगोर अंतर्राष्ट्रीय साहित्य एवं कला महोत्सव विश्वरंग 2022 समारोह के इस सत्र की अध्यक्षता अशोका फ़ैलो संतोष चौबे कर रहे थे। उन्होंने सरल शब्दों में कहा कि माँ का प्रेम कविता है और पिता का प्रेम कहानी। माँ के प्रेम को अक्सर कविता के माध्यम से तथा पिता के प्यार को गद्य के माध्यम से दर्शाया जाता है। आज के समय में यह सबसे ज़्यादा ज़रूरी है कि हम कविताओं के माध्यम से इस पर बात तो करें ही मगर इस पर साथ ही कार्य भी करें।
विश्व रंग यह कार्य कर रहा है। रक्षा दुबे चौबे ने मेड फ़ॉर ईच अदर कंस्पेट पर कविता कही तो निरंजन श्रोत्रिय ने वैलेंटाइन डे पर। अरुण देव ने कविता से पूछा- तुम कहाँ चले गए? मोहन सगोरिया ने भौतिकी और विज्ञान को कविता से जोड़ा तो सविता भार्गव ने स्त्री की कविता कही। नवल शुक्ल ने अपनी चर्चित जामुन कविता का पाठ किया। संचालन करने के साथ बलराम गुमास्ता ने अपनी कविताओं से भी श्रोताओं का दिल जीत लिया।
‘जनजातीय साहित्य एवं कलाओं में विश्व दृष्टि’ विषय पर आयोजित सत्र में लक्ष्मण गायकवाड़ (अध्यक्ष), शंपा शाह, त्रिलोक महावर, महादेव टोप्पो, देवीलाल पाटीदार बतौर वक्ता शामिल हुए। इस सत्र का संचालन प्रेमशंकर शुक्ल ने किया। कथा का समकाल: कहन के नये उपकरण पर सतीश जायसवाल की अध्यक्षता में भगवानदास मोरवाल, आनंद हर्षुल, प्रकाश कांत, उमाशंकर चौधरी, श्रद्धा थवाइत, कुणाल सिंह ने बात रखी।
3 वर्ष पहले
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