देश की कद्दावर नेता और ओजस्वी वक्ता के तौर पर अपनी पहचान बनाने वाली पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कल देर शाम निधन हो गया। उन्होंने विदेश मंत्री के तौर पर अपने कार्यकाल के दौरान दूसरे मुल्कों में फंसे भारतीयों की तत्काल प्रभाव के साथ मदद की। उनके जाने से भारतीय राजनीति को अपूरणीय क्षति पहुंची है।
उनके दिए भाषण लोगों को मंत्रमुग्ध कर देते थे और वह बहुत ही शालीनता के साथ विपक्षी दल को जवाब भी देती थीं। एक ऐसा ही वाक़या है जब तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शेर पढ़कर निशाना साधा, उन्होंने कहा कि
हमको उनसे है वफ़ा की उम्मीद
जो नहीं जानते वफ़ा क्या है
इसके जवाब में सुषमा जी ने कहा कि "शायरी का एक अदब होता है कि शेर का कभी उधार नहीं रखा जाता, इसलिए मैं प्रधानमंत्री का यह उधार चुकता करना चाहती हूं। एक नहीं दो शेर पढ़कर"। इसके बाद सुषमा जी ने शेर पढ़ा कि
कुछ तो मजबूरियां रही होंगी
यूं ही कोई बेवफ़ा नहीं होता
इसके बाद दूसरा कलाम यूं पढ़ा कि
तुम्हें वफ़ा याद नहीं हमें जफ़ा याद नहीं
ज़िंदगी और मौत के दो ही तो तराने हैं
एक तुम्हें याद नहीं एक हमें याद नहीं
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