आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

वरिष्ठ संपादक अच्युतानंद मिश्र पर केंद्रित पुस्तक के लोकार्पण समारोह में जुटे मीडिया दिग्गज

हलचल
                
                                                         
                            वरिष्ठ पत्रकार, संपादक और लेखक श्री अच्युतानंद मिश्र के जन्मदिन पर इन्दिरा गांधी राष्ट्रीय कला केन्द्र (आईजीएनसीए) में उनके व्यक्तित्व, कृतित्व और नेतृत्व पर केन्द्रित पुस्तक ‘अच्युतानंद मिश्रः समावेशी शब्द साधक’ का लोकार्पण सोमवार को किया गया। पुस्तक के संपादक डॉ. मनीषचंद्र शुक्ल हैं और इसका प्रकाशन प्रलेक प्रकाशन, मुंबई ने किया है। पुस्तक का लोकार्पण आईजीएनसीए के अध्यक्ष रामबहादुर राय, सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी, कलानिधि प्रभाग के अध्यक्ष व डीन (प्रशासन) प्रो. रमेश चंद्र गौड़, माधवराव सप्रे संग्रहालय, भोपाल के संस्थापक-संयोजक विजयदत्त श्रीधर, मध्यप्रदेश राष्ट्रभाषा प्रचार समिति, भोपाल के मंत्री संचालक कैलाशचंद्र पंत और प्रसिद्ध साहित्यकार प्रो. चंद्रकला त्रिपाठी और प्रो. कृपाशंकर चौबे ने किया। इस अवसर पर अच्युतानंद की भी गरिमामय उपस्थिति रही। लोकर्पण में पुस्तक के संपादक डॉ. मनीषचंद्र शुक्ल और प्रकाशक जितेंद्र पात्रो भी उपस्थित थे।
                                                                 
                            

कार्यक्रम के दौरान अच्युतानंद मिश्र के सहयोगी रहे साहित्यकारों और पत्रकारों ने अपने संस्मरण साझा किए। सबके संस्मरण भिन्न-भिन्न थे, लेकिन सबके संस्मरण से यह बात समान रूप से उभरी कि अच्युतानंद जी परिवार के बड़े की तरह सबकी बहुत चिंता करते हैं और अत्यंत समावेशी हैं। कोई भी उनसे अपना दुख-सुख निःसंकोच कह सकता है। उनके अंदर ममत्व और अपनत्व का भाव अद्भुत है। हिन्दी के प्राध्यापक रहे प्रो. रामाश्रय रत्नेश कहा कि उनमें निर्णय लेने की गजब की क्षमता है। उनका व्यक्तित्व चुंबकीय था। वरिष्ठ पत्रकार अरुण त्रिपाठी ने कहा कि अच्युता जी पत्रकारिता के अजातशत्रु हैं। ट्रिब्यून, चंडीगढ़ के संपादक  राजकुमार सिंह, वरिष्ठ पत्रकार और पत्रकारिता के अध्यापक प्रो. गोविंद सिंह, माइक्रोसॉफ्ट के निदेशक श्री बालेंदु शर्मा दाधीच, वरिष्ठ पत्रकार  संत समीर, भारतीय जनसंचार संस्थान के प्रो. प्रमोद कुमार, वरिष्ठ साहित्यकार श्रीमती नीरजा माधव, श्री आचार्य कृपलानी मेमोरियल ट्रस्ट के श्री अभय प्रताप, वरिष्ठ पत्रकार उमेश चतुर्वेदी, प्रसिद्ध साहित्यकार ज्योतिष जोशी ने अपने संस्मरण साझा किए। सबने उनके शतायु होने की कामना की।

 अच्युतानंद मिश्र जी ने सभी वक्ताओं के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा कि उनके प्रति जितने अच्छे-अच्छे विशेषणों का प्रयोग वक्ताओं ने किया, वह उनका प्रेम है। उन्होंने कहा, “मैंने कोई नया काम नहीं किया है, कोई अनोखा काम नहीं किया है। मैं आप सब के बीच से ही हूं और आप सब मेरे बहुत प्रिय हैं।”

उन्होंने बीते दौर के पत्रकारों और संपादकों से लेकर आज के दौर की पत्रकारिता पर भी बात की और कहा कि हर स्थिति में संपादकों को संघर्ष करना पड़ा है। उन्होंने कहा, “भारतेंदु हरिश्चंद्र से लेकर पं. महावीर प्रसाद द्विवेदी तक जिन लोगों ने उस दौर की पत्रकारिता की है, वो तो बहुत महान थे, लेकिन उसके बाद की जो पीढ़ी हुई, 1950 के बाद तो उस समय पराड़कर जी भी जीवित थे, अज्ञेय जी जीवित थे, तमाम नई पीढ़ी के संपादक जीवित थे और उन लोगों ने कम संघर्ष नहीं किया है।”

 उन्होंने कहा हिन्दी पत्रकारिता की जो स्थिति बन गई है, उसमें टेक्नोलॉजी के नाम पर मालिकों ने सबसे पहले अपना विचार बदल दिया, अपनी परिस्थितियां बदल दीं। मुझे याद है कि प्रिंट मीडिया के बाद जब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आया था, तो उस समय यह समझा गया था कि प्रिंट मीडिया खत्म हो जाएगा, अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया से आगे बात डिजिटल मीडिया आ गया है। तो हर परिस्थिति में संपादकों को संघर्ष ही करना पड़ा है, क्योंकि मालिकों की भूमिका बदल गई है।  आगे पढ़ें

एक वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर