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भारत रत्न प्रणब मुखर्जी के हाथों ग्रहण किया दिग्गज लेखकों और साहित्यकारों ने 'अमर उजाला शब्द सम्मान'

भारत रत्न प्रणब मुखर्जी ने दिग्गज लेखकों और साहित्यकारों को प्रदान किया 'अमर उजाला शब्द सम्मान'
                
                                                         
                            शब्दों की महान परंपरा के सतत सम्मान और श्रेष्ठतम सृजन को रेखांकित करने के लिए शुरू किए गए ‘अमर उजाला शब्द सम्मान’ नई दिल्ली के तीन मूर्ति सभागार में पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणब मुखर्जी ने प्रदान किया। इस शृंखला में दो सर्वोच्च अलंकरण ‘आकाशदीप’ हिंदी आलोचना के शिखर पुरुष आलोचक नामवर सिंह और भारतीय भाषाओं के लिए विख्यात नाटककार और फिल्मकार गिरीश कारनाड को दिए गए। आकाशदीप सम्मान के तहत स्मृति चिह्न के रूप में गंगा की प्रतिमा, प्रशस्ति पत्र और पांच लाख रुपये की राशि प्रदान की गई। 
                                                                 
                            

इसी कड़ी में 'छाप' सम्मान के तहत कथा श्रेणी का पुरस्कार युवा कहानीकार मनीष वैद्य को उनकी किताब ‘फुगाटी का जूता’, कविता श्रेणी में आर. चेतन क्रांति को उनकी पुस्तक ‘वीरता पर विचलित’, कथेतर गद्य श्रेणी में अनिल यादव की किताब ‘सोनम गुप्ता बेवफा नहीं है’ और अनुवाद के लिए भाषा बंधु सम्मान गोरख थोरात को दिए गए। हिंदी में किसी भी लेखक की पहली पुस्तक के लिए थाप सम्मान युवा उपन्यासकार प्रवीण कुमार की कृति ‘छबीला रंगबाज का शहर’ को दिया गया।

-कार्यक्रम के दौरान मंच पर पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न प्रणव मुखर्जी, अमर उजाला के मैनेजिंग डायरेक्टर श्री राजुल माहेश्वरी, समूह सलाहकार संपादक यशवंत व्यास, वरिष्ठ कवि मंगलेश डबराल और विश्वनाथ त्रिपाठी थे।  इस अवसर पर राजुल जी ने प्रणव दा को शॉल देकर सम्मानित किया। 
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7 वर्ष पहले

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