कब तक बोझ संभाला जाए,
युद्ध कहाँ तक टाला जाए,
तू भी राणा का वंशज है,
फेंक जहां तक भाला जाए।
उपरोक्त पंक्तियां लिखने वाले कौमी एकता के अलंबरदार मशहूर कवि वाहिद अली वाहिद का मंगलवार को निधन हो गया। वह 59 साल के थे। तीन दिन से उन्हें बुखार था। इलाज के लिए उन्हें लोहिया अस्पताल ले जाया गया लेकिन न तो उन्हें स्ट्रेचर मिला, न ही भर्ती किया गया।
वाहिद अली वाहिद की बड़ी बेटी शामिया ने बताया कि पिता की तबीयत पिछले तीन दिन से खराब थी। उन्हें हृदय रोग पहले से था। मंगलवार सुबह उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें इलाज के लिए लोहिया अस्पताल ले जाया गया लेकिन अस्पताल में उन्हें भर्ती ही नहीं किया गया और घर लौटा दिया। इसी बीच उनकी सांसें टूट गईं।
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