बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर, पं. श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी, जिन्हें श्रद्धापूर्वक 'श्री बागेश्वर धाम सरकार' के नाम से संबोधित किया जाता है, अपने जन्मोत्सव के पावन अवसर यानि 4 जुलाई को भारत मंडपम, नई दिल्ली में अपनी आध्यात्मिक कृति 'मेरा संन्यासी' के हिंदी एवं अंग्रेज़ी संस्करणों का लोकार्पण करेंगे।
श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिकता से भरी संध्या में इस आध्यात्मिक कृति का संदेश भारत ही नहीं, बल्कि विश्वभर के जिज्ञासु एवं श्रद्धालु पाठकों तक पहुँचेगा । इस शुभ अवसर पर देश के विभिन्न भागों से संत-महात्मा, आध्यात्मिक विभूतियाँ, विशिष्ट अतिथि एवं असंख्य श्रद्धालु एकत्र होकर इस भावपूर्ण आध्यात्मिक ग्रंथ के विमोचन का उत्सव मनाने हेतु एकत्रित हुए हैं ।
'मेरा संन्यासी' लेखक के परम-गुरु, संन्यासी बाबा के प्रति एक भावभीनी श्रद्धांजलि है । इस पुस्तक के माध्यम से पं. धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री बताते हैं कि कैसे उनके जीवन और लोक-कल्याण के संकल्प को उनके गुरु एवं परम-गुरु की अगाध श्रद्धा, भक्ति और मंगलमय आशीर्वाद ने दिशा प्रदान की है । यह संन्यासी बाबा की शिक्षाओं का परिचय देने के साथ-साथ श्री राम और हनुमान जी के प्रति अनन्य भक्ति जागृत करती है, एवं आध्यात्मिक उन्नति व आत्म-साक्षात्कार की प्रेरणा देती है ।
'मेरा संन्यासी' का यह विमोचन साहित्य, अध्यात्म और सनातन धर्म के शाश्वत मूल्यों के समागम का एक अविस्मरणीय उत्सव है । इस ग्रंथ का प्रकाशन भारत के प्रतिष्ठित प्रकाशक इन्विंसिबल पब्लिशर्स द्वारा सागर सेतिया जी के नेतृत्व में हो रहा है ।
युवा संत पं. श्री धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री कहते हैं-
उन्तीस वर्षों की जीवन यात्रा में, उन्नीस वर्ष हमने उस विलक्षण और विराट चेतना—‘श्री संन्यासी बाबा’ के संपर्क में गुज़ारे, जिसने एक साधारण बालक को उठाकर विश्व-कल्याण के सिंहासन पर आसीन कर दिया । वही हमारी वास्तविक शक्ति हैं, हम केवल माध्यम हैं । काया हमारी होती है, जो मात्र एक आवरण है, जबकि इस देह से निकलने वाली वाणी और विचार ‘श्री संन्यासी बाबा’ के होते हैं । हम एक वाद्य यंत्र की भाँति हैं—स्वर हमारे नहीं, लय हमारी नहीं; बजते हम हैं, सुनाई हम पड़ते हैं; लेकिन हमें बजाने वाले ‘श्री संन्यासी बाबा’ हैं । उन्हींने दरबार की परंपरा प्रवाहित की; व्यापक दृष्टि, आध्यात्मिक अनुभव—दर्शन, स्वप्न, स्वप्नादेश, अंतःप्रेरणा (intuition), सूक्ष्म संकेत, दरबार से संबंधित घटनाएँ, संकेत, किसी व्यक्ति के विषय में अचानक प्राप्त होने वाली चेतावनी या मार्गदर्शन—सभी उन्हीं की कृपा, प्रेरणा, मार्गदर्शन और संकल्प से होता है, न कि हमारी व्यक्तिगत इच्छा या क्षमता से । यह सान्निध्य केवल गुरु-शिष्य का संबंध नहीं, बल्कि एक सूक्ष्म ऊर्जा के साथ एकाकार होने का अनुभव है ।
कार्यक्रम का विवरण
पुस्तक: 'मेरा संन्यासी' (हिंदी और अंग्रेजी संस्करण)
लेखक: पं. श्री धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री जी (श्री बागेश्वर धाम सरकार)
समय, तारीख: सायं 5:40 बजे शनिवार, 4 जुलाई 2026
जगह: भारत मंडपम, नई दिल्ली
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