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'मां तुझे प्रणाम': स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के दिग्गज कवियों से सजेगी महफ़िल

'मां तुझे प्रणाम': स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर देश के दिग्गज कवियों से सजेगी महफिल
                
                                                         
                            अमर उजाला की ओर से देश व शहीदों को समर्पित कार्यक्रम 'मां तुझे प्रणाम' का आयोजन किया जा रहा है। इसके अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर 'ज़रा याद करो कुर्बानी' के माध्यम से काव्य-कैफ़े पर भी देशभक्ति के रंग देखने को मिलेंगे।
                                                                 
                            

हरिओम पंवार

हरिओम पंवार मंच के सुप्रसिद्ध नामों में से एक हैं। वीर रस के सशक्त हस्ताक्षर हैं। उनकी कविताएं राष्ट्रीय चेतना की अनुपम मिशाल हैं। जब भी वे व्यथित होते हैं या क्रोधित होते हैं तो अपनी परेशानी और गुस्से को काव्यात्मक ऊर्जा में ढाल देते हैं और पूरी निर्भयता के साथ देश-विदेश के मंचों पर गाते हैं। चाहे कश्मीर की समस्या रही हो या कालेधन की अथवा संवैधानिक संकट रहा हो, पंवार जी ने उन समस्याओं पर न केवल अपनी कलम चलाई बल्कि उसे मुखर अभिव्यक्ति दी। शहीदों के लिए समर्पित उनकी पंक्तियां देखिए- 

मैं केशव का पाञ्चजन्य भी गहन मौन में खोया हूँ
उन बेटों की आज कहानी लिखते-लिखते रोया हूँ
जिस माथे की कुमकुम बिन्दी वापस लौट नहीं पाई
चुटकी, झुमके, पायल ले गई कुर्बानी की अमराई
कुछ बहनों की राखियां जल गई हैं बर्फीली घाटी में
वेदी के गठबन्धन खोये हैं कारगिल की माटी में
पर्वत पर कितने सिन्दूरी सपने दफन हुए होंगे
बीस बसंतों के मधुमासी जीवन हवन हुए होंगे

टूटी चूड़ी, धुला महावर, रूठा कंगन हाथों का
कोई मोल नहीं दे सकता वासन्ती जज्बातों का
जो पहले-पहले चुम्बन के बाद लाम पर चला गया
नई दुल्हन की सेज छोड़कर युद्ध-काम पर चला गया

हास्य एवं व्यंग्य के पुरोधा कवि अशोक चक्रधर

इस कार्यक्रम में साथ जुड़ेंगे कवि अशोक चक्रधर। अशोक चक्रधर कविता की वाचिक परंपरा के अग्रणी कवि हैं जो हास्य-व्यंग्य के क्षेत्र में विशिष्ट नाम रखते हैं। इसके साथ वह गीतकार, निर्देशक और अभिनेता भी हैं। वर्ष 2014 में उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। अशोक चक्रधर हास्य एवं व्यंग्य के पुरोधा कवि तो हैं ही साथ ही विवेकी व्यक्ति हैं। धीरज न खोने वाले। कवि हैं तो आर पार देखने की क्षमता भी रखते हैं। वे मरते हुए व्यक्ति को भी हास्य की कविता सुना दें तो किसी अंग- उपांग में प्राण बचे हों तो लौट आएं।  वे जीवन के कवि हैं, हास-परिहास के कवि हैं, वे विट के कवि हैं, ह्यूमर के कवि हैं, वे प्रेरणा के कवि हैं, उदभावना और संभावना के कवि हैं, जीवन के कवि हैं।

भाजी पर कंट्रोल करेगा, 
हमसे टालमटोल करेगा
देश का पैसा गोल करेगा, 
इधर हार्ट में होल करेगा
तो देश का बच्चा बच्चा बच्चू, 
चेहरे पर तारकोल करेगा।
सुनो साथियो !
इस पाजी ने मेरी प्लेट में
भाजी की कम मात्रा की थी, 
नमक टैक्स जब लगा
तो अपने गांधी जी ने
डांडी जी की यात्री की थी। 

पैसा पूरा, प्याली खाली, 
हमने भी सौगंध उठा ली-
यह बेदर्दी नहीं चलेगी, 
अंधेरगर्दी नहीं चलेगी।
जनशोषण करने वालों को 
बेनकाब कर 
अपना आईना दिखलाओ, 
आओ आओ, 
ज़ालिम से मिलकर टकराओ। 
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हास्य एवं व्यंग्य के पुरोधा कवि अशोक चक्रधर

6 वर्ष पहले

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