हिन्दी दिवस के अवसर पर अमर उजाला ‘काव्य’ की ओर से ‘काव्य-गोष्ठी’ का आयोजन किय गया, यह कार्यक्रम अमर उजाला के नोएडा स्थित ऑफ़िस परिसर में हुआ। इस कार्यक्रम में प्रसिद्ध कवियों ने शिरकत की। समारोह में हिंदी में मुक्तक और गजल के कवि डॉ कुंअर बेचैन, प्रसिद्ध कवियित्रियों अनामिका और इंदु सिंह ने अपनी काव्य पंक्तियों से हिंदी दिवस के अहम पहलुओं को पाठकों के सामने रखा।
डॉ० कुँअर बेचैन
कुंअर बेचैन का वास्तविक नाम डॉ० कुँवर बहादुर सक्सेना है जो कि हिंदी ग़ज़ल व गीत के हस्ताक्षर हैं। इन्होंने अनेक विधाओं में साहित्य-सृजन किया है व इनके अनेक गीत संग्रह, ग़ज़ल संग्रह, काव्य संग्रह, महाकाव्य तथा एक उपन्यास प्रकाशित हो चुके हैं।
सम्मान: साहित्य सम्मान (1977), उ०प्र० हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण (2004), परिवार पुरस्कार सम्मान, मुंबई (2004), राष्ट्रपति महामहिम ज्ञानी जैलसिंह एवं महामहिम डॉ० शंकरदयाल शर्मा द्वारा सम्मानित, अनेक विश्व विद्यालयों तथा महाराष्ट्र एवं गुजरात बोर्ड के पाठ्यक्रमों मे संकलित।
अनामिका-
अनामिका कविता, उपन्यास, कहानी, संस्मरण, आलोचना, विमर्श, अनुवाद जैसी विधाओं की धनी हैं। इनके कविता संग्रह खुरदरी हथेलियाँ, गलत पते की चिट्ठी, दूब-धान, बीजाक्षर, अनुष्टुप, समय के शहर में, कविता में औरत प्रकाशित हो चुके हैं और साथ ही कहानी संग्रह प्रतिनायक भी प्रकाशित हो चुका है। इनके उपन्यास हैं अवांतर कथा, दस द्वारे का पिंजरा तथा तिनका तिनके पास
संस्मरण : एक ठो शहर : एक गो लड़की, एक थे शेक्सपीयर, एक थे चार्ल्स डिकेंस
आलोचना : पोस्ट-इलियट पोएट्री : अ वॉएज फ्रॉम कांप्लिक्ट टु आइसोलेशन, डन-क्रिटिसिज्म डाउन दि एजेज, ट्रीटमेंट ऑव लव ऐंड डेथ इन पोस्ट वार अमेरिकन पोएट्स
विमर्श : स्त्रीत्व का मानचित्र, मन माँजने की जरूरत, पानी जो पत्थर पीता है
अनुवाद : औरतों की मेज का कवि - रिल्के, कहती हैं औरतें (विश्व साहित्य की स्त्रीवादी कविताएँ), नागमंडल (गिरीश कर्नाड), अटलांत के आर-पार (समकालीन अँग्रेजी कविता)
अनामिका को राजभाषा परिषद पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल पुरस्कार, गिरिजा कुमार माथुर सम्मान, साहित्यकार सम्मान, केदार सम्मान, परंपरा सम्मान, साहित्य सेतु सम्मान आदि से सम्मानित भी किया जा चुका है।
इंदु सिंह-
इंदु सिंह आकाशवाणी व दूरदर्शन समेत कई टीवी कार्यक्रमों के लिए भी काव्य पाठ कर चुकी हैं। इनका काव्य संग्रह तेरे समक्ष हिन्दी अकादमी दिल्ली से प्रकाशित हो चुका है।
दोपहर 3 बजे आयोजित हुआ यह कार्यक्रम अमर उजाला टीवी पर और अमर उजाला के फ़ेसबुक पेज के लगभग 75 लाख पाठकों के बीच एक साथ लाइव हुआ।
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