एफटीआईआई, पुणे ने त्रिवेणी कला संगम के सहयोग से वयस्कों के लिए एक विशेष ऑन-कैंपस लघु पाठ्यक्रम की घोषणा की है – ‘गुरु दत्त की फिल्मों के गीतों की सराहना पर आधारित मूलभूत पाठ्यक्रम (गुरु दत्त की जन्मशती को श्रद्धांजलि)’, जो कि एफटीआईआई के ‘सेंटर फॉर ओपन लर्निंग (CFOL)’ कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित किया गया है।
एफटीआईआई (फिल्म एंड टेलीविज़न इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया) ने भारतीय सिनेमा के स्वर्णिम युग के महान निर्माता, निर्देशक और अभिनेता गुरु दत्त की 100वीं जयंती समारोह की शुरुआत उनके फिल्मों के गीतों पर आधारित एक विशेष फिल्म एप्रिसिएशन कोर्स के साथ की। यह कोर्स गुरु दत्त के जीवन, उनके समय, फिल्मों और गीतों को, 'बाज़ी' से लेकर 'साहिब बीवी और ग़ुलाम' तक विस्तार से प्रस्तुत करता है।
इस कोर्स में 48 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया, जो विभिन्न क्षेत्रों से आए थे—जिनमें फिल्म निर्माता, फिल्म प्रोफेशनल्स, अभिनेता, सिनेमा के विद्वान, कलाकार, शोधकर्ता और सिनेप्रेमी शामिल थे। इस कोर्स को डिजाइन और संचालित किया फिल्म निर्माता और एफटीआईआई के प्रोफेसर डॉ. मिलिंद डामले ने, जिन्होंने 'प्यासा' से पहले और 'काग़ज़ के फूल' के बाद के गुरु दत्त के जीवन और रचनात्मकता की जादुई यात्रा को प्रस्तुत किया।
एनएफडीसी (नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कॉरपोरेशन) के आर्टिस्टिक डायरेक्टर पंकज सक्सेना ने प्रतिभागियों को 'प्यासा' और 'काग़ज़ के फूल' के बीच के रचनात्मक दौर की यात्रा करवाई, जिसमें गुरु दत्त की सोच और संवेदनशीलता को करीब से समझाया गया।
यह पूरी तरह उपयुक्त था कि यह कोर्स एफटीआईआई द्वारा आयोजित किया गया—वही संस्थान जिसके परिसर में पहले प्रतिष्ठित प्रभात स्टूडियो हुआ करता था, जहां गुरु दत्त ने फिल्म निर्माण की बारीकियाँ सीखी थीं। यह कार्यक्रम नई दिल्ली के त्रिवेणी कला संगम में आयोजित हुआ, जिसकी स्थापना श्रीमती सुंदरी के. श्रीधरानी ने की थी—जो गुरु दत्त की सहपाठी थीं और अल्मोड़ा स्थित उदय शंकर के प्रतिष्ठित इंडिया कल्चरल सेंटर में उनके साथ पढ़ी थीं।
एक वर्ष पहले
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