सरबजीत एस पुरी और कुणाल अवस्थी ने 'हाशिए' के या छोटे शहर कहे जाने वाले भौगोलिक क्षेत्रों के आर्थिक पक्ष को बताते हुए किताब लिखी है - The Power of Tier 3 and 4 Cities - Gateway to $10 Trillion Economy। यानी देश के उन छोटे शहरों पर लिखी किताब जिनके बुनियादी ढांचे को मैट्रों शहरों का तुलना में बहुत कम माना जाता है। वहीं ये किताब इसे शक्तिशाली इंजन के रूप में देखते हुए 10 ट्रलियन की अर्थव्यवस्था बताती है। यह पुस्तक दिखाती है कि महानगरों की चमक के पीछे छिपे टियर-3 और टियर-4 शहर अब बढ़ती आकांक्षाओं, डिजिटल कनेक्टिविटी, बेहतर बुनियादी ढांचे और उद्यमशील ऊर्जा के दम पर विकास के महत्वपूर्ण इंजन बनते जा रहे हैं।
एमएसएमई, कृषि, रिटेल, शिक्षा और ई-कॉमर्स जैसे क्षेत्रों में अवसरों को ध्यान में रखते हुए किताब बताती है कि भारत का आर्थिक भविष्य अब केवल महानगरों में नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी बसता है। यह किताब निवेशकों, नीति-निर्माताओं और उद्योगपतियों के लिए एक तरह का रास्ता बताती है जिससे 10 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था के स्वप्न को सच में बदला जा सकता है।
इसके पीछे सोशल मीडिया से लेकर, बेहतर इंटरनेट स्पीड तक सभी महत्वपूर्ण कारक काम करते हैं। इसी के साथ एक महत्वपूर्ण बात ये भी है कि छोटे शहरों के लोग अब उद्यमिता की ओर बढ़ रहे हैं। डिजिटलीकरण इसमें सबसे प्रमुख भूमिका निभाता है, जिससे भूगोल की सीमाओं के परे और ई-कॉमर्स के विस्तार के साथ बिज़नेस और सरलता से किया जा सकता है। अब किसी भी उद्यम के ग्राहक एक दुकान या आस-पास के क्षेत्र तक सीमिट नहीं हैं। इसमें फूड से लेकर कपड़े और एफएमसीसी के अंतर्गत आने वाले तमाम उत्पाद शामिल हैं।
लेखक परिचय -
सरबजीत एस पुरी - फ़तेह रूरल लिमिटेड के संस्थापक एवं चेयरमैन हैं और उन्हें ग्रामीण मार्केटिंग में दो दशकों से अधिक का अनुभव है। उन्होंने भारत भर में 100 से अधिक कॉरपोरेट्स के लिए अभियान संचालित किए हैं।
कुणाल अवस्थी - एक एफएमसीजी और रिटेल विशेषज्ञ हैं, जिन्हें 26 से अधिक वर्षों का वैश्विक अनुभव है। वे हमदर्द फूड्स में कंसल्टेंट, उद्यमी और वैश्विक व्यापार सलाहकार के रूप में कार्यरत हैं।
दोनों लेखक मिलकर महानगरों से परे भारत की विकास यात्रा पर गहरी और व्यावहारिक अंतर्दृष्टि प्रस्तुत करते हैं।
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