आप अपनी कविता सिर्फ अमर उजाला एप के माध्यम से ही भेज सकते हैं

बेहतर अनुभव के लिए एप का उपयोग करें

विज्ञापन

सारा शहर ग़ज़ल कहता है - नज़्मों को रूह रचती है...

sara shahar ghazal kehta hai book review in hindi
                
                                                         
                            
जब मुशायरों की बात होती है, तो दिल मान लेता है कि बात फुर्सत की ही होगी।  लेकिन जब उर्दू की बात होती है, तो अदब से अदब की बात होती है और जब नज्म की बात होती है, तो लगता है कि अल्फाज नहीं, रूह की रूह से बात हो रही है। मशहूर शायर शीन काफ निजाम की फनकारी पर रची इस किताब में डॉ. निसार राही ने एक अनोखी कारीगरी की है, लेकिन कई जगह नज्मों की व्याख्या बेवजह लंबी खिंची हुई महसूस होती है।

किताब- सारा शहर गजल कहता है
संपादन- डॉ. निसार राही
प्रकाशक- सिटिजन्स सोसाइटी फॉर एजूकेशन, जयपुर 
मूल्य- 500 रुपये
7 वर्ष पहले

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
विज्ञापन
X
बेहतर अनुभव के लिए
4.3
ब्राउज़र में ही

अब मिलेगी लेटेस्ट, ट्रेंडिंग और ब्रेकिंग न्यूज
आपके व्हाट्सएप पर