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Book Review: इतनी भी भोली नहीं है बार्बी डॉल

पुस्तक समीक्षा
                
                                                         
                            इसी महीने प्रकाशित यह बेस्टसेलर किताब सिर्फ बार्बी की कहानी नहीं, बल्कि यह भी बताती है कि एक प्लास्टिक की गुड़िया कैसे महिलाओं की छवि, पूंजीवाद और वैश्विक ब्रांडिंग का हथियार बन गई।
                                                                 
                            

लगभग सात दशकों तक, मैटल कंपनी ने बार्बी को पहली वयस्क गुड़िया बताया-यह उससे पहले की बेबी डॉल्स का एक क्रांतिकारी विकल्प था, जो छोटी लड़कियों को भविष्य की मां मानती थीं, न कि भविष्य की औरतें। लेकिन बार्बी कोई मौलिक रचना नहीं थी। वह एक नकल थी: एक जर्मन डॉल की लगभग हूबहू कॉपी, जिसे आख्यान से हटा दिया गया, ताकि मैटल की पसंदीदा गुड़िया को जगह मिल सके। यह बार्बी का पहला रहस्य था, लेकिन आखिरी नहीं।

पत्रकार और द ड्रिफ्ट की संपादक टार्पली हिट ने अपनी बेस्टसेलर चर्चित पुस्तक बार्बीलैंड में दुनिया की सबसे मशहूर गुड़िया की लंबे समय से छिपी हुई कहानी और रहस्यों का खुलासा किया है। बार्बी दुनिया भर की लड़कियों के दिलों की रानी बन गई और वहीं बनी रही। उसने रणनीतिक विपणन, सरकारी असर, बेरहम मुकदमेबाजी और क्लासिक जासूसी नॉवेल जैसे खुफिया तरीकों से अपने प्रतिद्वंद्वियों को दूर रखा। टार्पली हिट ने खुलासा किया है कि बार्बी को बनाने वाली कंपनी चाहती थी कि लोग विश्वास करें कि उसने बार्बी बनाई, और इसे सच साबित करने के लिए उसने हदें पार कीं।

बार्बी की शुरुआत की कहानी काफी दिलचस्प है-जैसा कि बार्बीलैंड में बताया गया है, कैसे मैटल ने जासूसी, नकल और चोरी करके बाजार पर कब्जा किया, और फिर लोगों को खरीदने के लिए विवश करने की खातिर आक्रामक लड़ाई लड़ी।

1959 में लॉन्च हुई बार्बी एक जर्मन अखबार के कार्टून कैरेक्टर लिली पर आधारित थी, जिसे देखकर एक जर्मन खिलौना निर्माता ने खिलौना बनाया था। लिली डॉल 1955 में आई थी, जो ‘एक प्लास्टिक मार्लिन डिट्रिच जैसी दिखती थी-बहुत पतली, बनावटी तौर पर खुशमिजाज, तिरछी नजर, पर झुकी हुई भौंहें।’ बार्बी की अमेरिकी सर्जक, जोशीली रूथ हैंडलर ने 1956 में यूरोप की यात्रा के दौरान कई लिली डॉल खरीदीं। हालांकि, खिलौनों के बड़े कारोबारी लुई मार्क्स को अमेरिका में लिली बेचने का अनुबंध मिला था, लेकिन दो साल तक चले मुकदमे के बाद मैटल कंपनी की जीत हुई।

अमेरिकी व्यवसाय की अंदरूनी दुनिया की यह मजेदार और दमदार यात्रा कॉरपोरेट दिग्गजों, सांस्कृतिक प्रभाव डालने वाले और खिलौनों की दुनिया के प्रतिद्वंद्वियों पर से पर्दा हटाती है, जिन्होंने इस आइकॉन की दुनिया को आकार दिया। शुरू से ही कंपनी ने बार्बी को ‘एक ऐसा उत्पाद नहीं समझा, जो पहली बिक्री के साथ खत्म हो जाए, बल्कि इसे कुछ ऐसा समझा, जिसे संग्रहीत किया जा सके।’ खोजी रिपोर्टिंग, अनुसंधान और इंटरव्यू के जरिये बार्बीलैंड उस अनूठी कहानी को पाठकों के सामने परोसती है, जिसने बार्बी को अरबों डॉलर का ब्रांड बनाया और उसे एक पहचान दी-एक ऐसा प्रतीक, जो अमेरिकन सॉफ्ट पावर के लिए कोका-कोला और मैकडॉनल्ड्स के फ्रेंच फ्राइज जितना ही मशहूर है।

बार्बीलैंडः द अनऑथराइज्ड हिस्ट्री
लेखिका : टार्पली हिट


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8 महीने पहले

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