अयोध्या को श्रीराम की जन्मभूमि होने का गौरव प्राप्त है। आरंभ से यह वशिष्ठ, वामदेव, जावालि, सुयज्ञ, मांडव्य तथा पराशर आदि मुनियों की कर्मभूमि रही है। विभिन्न कालखण्डों में यहां उत्पन्न हुए सन्तों के जनोपयोगी और श्रेष्ठ विचार मानवता को सन्मार्ग पर चलने को प्रेरित करते रहे हैं। यहां देश के विभिन्न भागों से भवबंधन के पार जाने के निमित्त सन्त महापुरुषों का आगमन होता रहा है।
प्रत्येक युग में सभी मतावलम्बियों के जिज्ञासुओं को यह पूरी आकर्षित करती रही है। परिस्थितियों के प्रतिकूल होने पर भी यह सन्तों द्वारा सदा सेवित रही है। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या की वर्तमान कुलपति प्रो. (डॉ.) प्रतिभा गोयल की यह पुस्तक इन्हीं महान सन्तों को समर्पित है। प्रो. (डॉ.) प्रतिभा गोयल एक सफल शिक्षाविद् एवं शोधकर्ता होने के साथ-साथ उच्चकोटि की लेखिका, सम्पादिका एवं प्रभावशाली वक्ता हैं। वह हिन्दी, पंजाबी और अंग्रेजी में साधिकार लिखती हैं।
पुस्तक- अयोध्या के संत
प्रकाशन- किताबवाले
लेखिका- डाॅ. प्रतिभा गोयल
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