लेकिन इस सोच के विरोधियों का कहना है कि परमाणु संयंत्र जोखिम भरे होते हैं। वैसे भी दुनिया में इस मामले में तकनीक जहां तक पहुंच गई है, उसे हासिल करना ऑस्ट्रेलिया के लिए आसान नहीं है। अब दोनों पक्षों में ये राय बनी है कि ऑकुस समझौते के साथ ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा का विकल्प चुन लिया है। हालांकि इस बारे में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन या उनकी सरकार की तरफ से अभी कुछ साफ नहीं कहा गया है। मॉरीसन ने सिर्फ यह कहा है कि परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियां बनाने की दिशा में ये करार एक बड़ी पहल है।
परमाणु तकनीक के समर्थकों का कहना है कि ताजा करार से ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम की अधिक खुदाई और विश्व बाजार में उसे बेचने का रास्ता भी खुलेगा। यह ऑस्ट्रेलिया की आय का बड़ा स्रोत बन सकता है। कई मीडिया रिपोर्टों में ये आकलन छापा गया है कि यूरेनियम की अंतरराष्ट्रीय बिक्री और देश के अंदर उसका ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल करने से ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को कितना लाभ हो सकता है।
लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन लगातार ऑकुस समझौते का विरोध कर रहे हैं। गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने इसके खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन आयोजित किया। ग्रीन पार्टी ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि ऑस्ट्रेलिया ने समुद्र पर तैरते चेर्नोबिल बनाने का फैसला किया है। चेर्नोबिल सोवियत संघ में परमाणु संयंत्र था, जो भीषण दुर्घटना का शिकार हो गया था। ग्रीन पार्टी के संस्थापक बॉब ब्राउन ने ध्यान दिलाया है कि 1983 में यह फैसला हुआ था कि ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा नहीं बनाएगा। लेकिन मौजूदा सरकार ने बिना जनमत संग्रह कराए उस निर्णय को पलट दिया है।