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ऑकुस करार: समझौते के बाद ऑस्ट्रेलिया में छिड़ी परमाणु ऊर्जा की जरूरत पर बहस, ग्रीन ने बताया समुद्र पर तैरते चेर्नोबिल

Sat, 02 Oct 2021 04:39 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा

सार

पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन लगातार ऑकुस समझौते का विरोध कर रहे हैं। ग्रीन पार्टी के संस्थापक बॉब ब्राउन ने ध्यान दिलाया है कि 1983 में यह फैसला हुआ था कि ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा नहीं बनाएगा। लेकिन मौजूदा सरकार ने बिना जनमत संग्रह कराए उस निर्णय को पलट दिया है...
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जो बिडेन और बोरिस जॉनसन के साथ स्कॉट मॉरिसन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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ऑकुस (ऑस्ट्रेलिया- यूनाइटेड किंगडम- यूनाइटेड स्टेट्स) करार ने ऑस्ट्रेलिया में परमाणु ऊर्जा के सवाल पर तीखी बहस छेड़ दी है। आलोचकों की दलील है कि ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम का समृद्ध भंडार होने के बावजूद पहले यहां कभी भी परमाणु ऊर्जा या हथियार विकसित करने के बारे में नहीं सोचा गया। यह एक सोझी-समझी नीति का परिणाम था। लेकिन अब अमेरिका और ब्रिटेन की टेक्नोलॉजी से ऑस्ट्रेलिया में परमाणु क्षमता वाली पनडुब्बियां बनाने की परियोजना ने उस नीति को पलट दिया है।

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विश्लेषकों का कहना है कि ऑस्ट्रेलिया के पास यूरेनियम के साथ-साथ कोयले का भी समृद्ध भंडार है। इसलिए यहां ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक तरह की आश्वस्ति का भाव रहा है। इसीलिए ऑस्ट्रेलिया में परमाणु ऊर्जा के लिए एक ही छोटा रिएक्टर है। इसके अलावा एकमात्र रिसर्च सेंटर ऑस्ट्रेलिया इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लीयर साइंस एंड इंजीनियरिंग है, जो तकरीबन साठ साल पहले बना था।

ऑस्ट्रेलियाई मीडिया में चल रही चर्चा के मुताबिक ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा सत्ताधारी गठबंधन के कुछ हिस्से 2018 से परमाणु ऊर्जा की दिशा में बढ़ने की वकालत कर रहे थे। उनकी दलील थी कि कोयला से चलने वाले बिजली संयंत्रों को बंद करने से बिजली की जो कमी होगी, अक्षय ऊर्जा के स्रोत उसकी पूर्ति नहीं कर पाएंगे। चूंकि ऑस्ट्रेलिया के पास यूरेनियम का बड़ा भंडार है, इसलिए उसके लिए परमाणु ऊर्जा की दिशा में बढ़ना सस्ता और उचित विकल्प होगा।

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लेकिन इस सोच के विरोधियों का कहना है कि परमाणु संयंत्र जोखिम भरे होते हैं। वैसे भी दुनिया में इस मामले में तकनीक जहां तक पहुंच गई है, उसे हासिल करना ऑस्ट्रेलिया के लिए आसान नहीं है। अब दोनों पक्षों में ये राय बनी है कि ऑकुस समझौते के साथ ऑस्ट्रेलिया ने परमाणु ऊर्जा का विकल्प चुन लिया है। हालांकि इस बारे में प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरीसन या उनकी सरकार की तरफ से अभी कुछ साफ नहीं कहा गया है। मॉरीसन ने सिर्फ यह कहा है कि परमाणु क्षमता से लैस पनडुब्बियां बनाने की दिशा में ये करार एक बड़ी पहल है।

परमाणु तकनीक के समर्थकों का कहना है कि ताजा करार से ऑस्ट्रेलिया में यूरेनियम की अधिक खुदाई और विश्व बाजार में उसे बेचने का रास्ता भी खुलेगा। यह ऑस्ट्रेलिया की आय का बड़ा स्रोत बन सकता है। कई मीडिया रिपोर्टों में ये आकलन छापा गया है कि यूरेनियम की अंतरराष्ट्रीय बिक्री और देश के अंदर उसका ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल करने से ऑस्ट्रेलियाई अर्थव्यवस्था को कितना लाभ हो सकता है।

लेकिन पर्यावरण संरक्षण के लिए काम करने वाले संगठन लगातार ऑकुस समझौते का विरोध कर रहे हैं। गैर सरकारी संगठन ग्रीनपीस ने इसके खिलाफ सड़कों पर प्रदर्शन आयोजित किया। ग्रीन पार्टी ने इसकी आलोचना करते हुए कहा है कि ऑस्ट्रेलिया ने समुद्र पर तैरते चेर्नोबिल बनाने का फैसला किया है। चेर्नोबिल सोवियत संघ में परमाणु संयंत्र था, जो भीषण दुर्घटना का शिकार हो गया था। ग्रीन पार्टी के संस्थापक बॉब ब्राउन ने ध्यान दिलाया है कि 1983 में यह फैसला हुआ था कि ऑस्ट्रेलिया परमाणु ऊर्जा नहीं बनाएगा। लेकिन मौजूदा सरकार ने बिना जनमत संग्रह कराए उस निर्णय को पलट दिया है।
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