एक अन्य राजयनिक ने इस वेबसाइट से कहा कि ईरान अब संभवतया अमेरिका को कमजोर समझ रहा है। यह अमेरिकी फौज की वापसी के बाद अफगानिस्तान में जो हालात बने, उसका नतीजा है। उस राजनयिक ने कहा कि अगर ईरान में ऐसी धारणा है, तो बातचीत में उसका और सख्त रुख देखने को मिलेगा।
अब स्वतंत्र विश्लेषकों को भी उम्मीद नहीं है कि ईरान परमाणु डील जल्द फिर से लागू हो पाएगी। थिंक टैंक यूरेशिया ग्रुप के विश्लेषक हेनरी रोम ने कहा है कि अब ये संभावना नहीं है कि ऐसा इस साल हो पाएगा। इस डील में ईरान की कितनी दिलचस्पी बची है, इसको लेकर अनिश्चय बढ़ रहा है। उससे इस डील में देर होने की आशंका भी बढ़ रही है।
आईएईए ने पिछले रविवार को एक गोपनीय रिपोर्ट अपने सदस्य देशों को भेजी थी। वेबसाइट पॉलिटिको का कहना है कि उस रिपोर्ट की कॉपी उसे हाथ लगी है। उसके मुताबिक आईएईई ने कहा है कि ईरान ने हाल में कराज परमाणु स्थल पर उसके निरीक्षकों को नहीं जाने दिया। यह हाल में ईरान के साथ आईएईए के हुए समझौते का उल्लंघन है।