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CJP के समर्थन में क्या बोलीं अमेरिकी सांसद? भारतीय राजदूत क्वात्रा ने जताई कड़ी आपत्ति

Fri, 16 Oct 2026 03:48 AM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

भारत की चुनावी प्रक्रिया पर अमेरिका से सवाल और भारत की तरफ से दो टूक जवाब! अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत की मतदाता सूची से करोड़ों नाम हटाए जाने पर चिंता जताई, तो अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने इसे भारत के अंदरूनी मामलों में अस्वीकार्य दखलअंदाजी करार दिया। जयपाल ने भारतीय लोकतंत्र और मतदाताओं के अधिकारों पर सवाल उठाए हैं, जबकि भारत ने अपने लोकतांत्रिक ढांचे और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाओं का हवाला दिया है। इसी बीच अमेरिका के इलिनॉय में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर कथित सामूहिक गोलीबारी की साजिश का मामला भी सामने आया है। अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने खुलासा किया है कि जिस मंदिर में कथित हमले की कोशिश हुई, वहां वह और उनका परिवार भी मौजूद थे। ऐसे में एक तरफ भारत की चुनावी प्रक्रिया पर अंतरराष्ट्रीय बयानबाजी है, तो दूसरी तरफ अमेरिका में भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है।

भारत के लोकतंत्र और चुनावी प्रक्रिया पर अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल की टिप्पणियों पर भारत ने कड़ा ऐतराज जताया है। अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जवाब देते हुए कहा कि भारत की चुनावी और राजनीतिक प्रक्रियाओं पर जयपाल की टिप्पणियां देश के आंतरिक मामलों में अस्वीकार्य दखलअंदाजी हैं। क्वात्रा ने कहा कि भारत एक जीवंत लोकतंत्र है, जहां मजबूत और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं मौजूद हैं। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराने के भारत के लंबे इतिहास का भी उल्लेख किया। साथ ही कहा कि जयपाल की गलतफहमियां दूर करने के लिए उनके साथ रचनात्मक बातचीत करने को भारत तैयार है।

दरअसल, अमेरिकी सांसद प्रमिला जयपाल ने भारत की मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर के दौरान नाम हटाए जाने पर चिंता जताई थी। उन्होंने दावा किया कि भारत में करीब 13 करोड़ लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाने की कार्रवाई हो रही है। जयपाल ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का समर्थन करते हुए कहा कि भारतीय नागरिकों को भी पारदर्शी और निष्पक्ष चुनावी प्रक्रिया का अधिकार है। उन्होंने भारत की स्थिति की तुलना अमेरिका में मतदान के अधिकारों को लेकर चल रही बहस से भी की। हालांकि, उनके बयान में इस्तेमाल किए गए आंकड़े और चुनावी प्रक्रिया पर उनकी व्याख्या को भारत के राजदूत ने चुनौती दी है।

मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का मुद्दा आंकड़ों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। उपलब्ध निर्वाचन आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, एसआईआर के शुरुआती दो चरणों में 13 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा मतदाता सूचियों से करीब 7.2 करोड़ नाम हटाए गए थे। वहीं, तीसरे चरण में 18 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की मसौदा सूचियों में करीब 6.16 करोड़ नाम बाहर किए जाने की जानकारी दी गई है। ध्यान देने वाली बात यह है कि मतदाता सूची से नाम हटने का मतलब हर मामले में किसी योग्य मतदाता का नाम गलत तरीके से हटना नहीं है। निर्वाचन आयोग के अनुसार, यदि किसी पात्र मतदाता का नाम गलती से हट गया है, तो वह दावा-आपत्ति प्रक्रिया के तहत फॉर्म-6 भरकर नाम दोबारा जुड़वाने का अनुरोध कर सकता है।

इस बीच अमेरिका से आई दूसरी खबर ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ा दी है। इलिनॉय के ऑरोरा शहर में एक हिंदू मंदिर को निशाना बनाकर कथित सामूहिक गोलीबारी की साजिश का मामला सामने आया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, 19 वर्षीय एलेक्जेंड्रोस पापोराकिस पर हमले की योजना बनाने के आरोप हैं। अभियोजन पक्ष का दावा है कि कथित हमले के दौरान उसकी राइफल जाम हो गई और बाद में सहकर्मियों को उसके दोबारा हमला करने की योजना के बारे में पता चला। सहकर्मियों की सूचना के बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार किया। जांचकर्ताओं को उसके घर से हथियार, गोला-बारूद और कथित तौर पर श्वेत वर्चस्ववादी विचारों वाला दस्तावेज भी मिला। मामले की जांच जारी है। 

अमेरिकी सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने इस घटना पर चिंता जताते हुए कहा कि वह और उनका परिवार उसी हिंदू मंदिर में पूजा कर रहे थे, जब कथित हमले की कोशिश हुई। उन्होंने उन लोगों का आभार जताया, जिन्होंने पुलिस को सूचना देकर संभावित त्रासदी रोकने में मदद की। कृष्णमूर्ति ने भारतीय-अमेरिकियों के खिलाफ नफरत और श्वेत वर्चस्ववादी विचारधारा का मिलकर मुकाबला करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि नफरत से प्रेरित हिंसा की धमकियों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। 

यानी भारत की चुनावी प्रक्रिया पर अमेरिकी सांसद की टिप्पणी से शुरू हुआ विवाद अब लोकतंत्र, मतदाता अधिकारों और संप्रभुता की बहस तक पहुंच गया है। वहीं, अमेरिका में हिंदू मंदिर पर कथित हमले की साजिश ने भारतीय समुदाय की सुरक्षा का सवाल भी सामने रखा है। भारत ने चुनावी प्रक्रिया पर बाहरी टिप्पणियों को लेकर अपना रुख स्पष्ट किया है, जबकि अमेरिकी अधिकारी मंदिर से जुड़े मामले की जांच कर रहे हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि चुनावी पुनरीक्षण से जुड़े सवालों पर आगे क्या स्पष्टीकरण आता है और अमेरिका में कथित हमले के मामले में जांच किस दिशा में बढ़ती है।

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