उत्तरी अटलांटिक महासागर में आखिर ऐसा क्या हुआ कि एक तेल टैंकर की जब्ती अब परमाणु युद्ध की धमकी तक पहुंच गई? अमेरिका ने रूसी झंडा लगे जहाज को क्यों पकड़ा? क्या यह कानूनन कार्रवाई थी… या फिर रूस के खिलाफ खुली चुनौती? रूसी सांसद ने अमेरिकी जहाजों पर टॉरपीडो हमले और परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की बात क्यों कही?
क्या एक नागरिक टैंकर की घटना अमेरिका-रूस टकराव को युद्ध के मुहाने तक ले जा सकती है? और क्या यह सिर्फ एक जहाज की कहानी है या महाशक्तियों के बीच शक्ति प्रदर्शन की नई शुरुआत?
रूस और अमेरिका के बीच एक बार फिर टकराव की आहट तेज हो गई है। उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी सेना द्वारा रूसी ध्वज वाले तेल टैंकर को जब्त किए जाने के बाद रूस की ओर से बेहद आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आई है। रूस के एक वरिष्ठ सांसद ने न सिर्फ अमेरिकी कार्रवाई को समुद्री डकैती करार दिया, बल्कि जवाब में अमेरिकी जहाजों पर हमले और यहां तक कि परमाणु हथियारों के इस्तेमाल तक की चेतावनी दे दी है।
मामला 7 जनवरी का बताया जा रहा है, जब अमेरिकी तटरक्षक बल ने रूसी ध्वज वाले एक तेल टैंकर को उत्तरी अटलांटिक महासागर में जब्त कर लिया। इस टैंकर का नाम ‘मरीनेरा’ है, जिसे पहले ‘बेला-1’ के नाम से जाना जाता था। बताया जा रहा है कि यह टैंकर वेनेजुएला के पास प्रतिबंधित तेल टैंकरों पर लगी अमेरिकी नाकाबंदी से बचते हुए दो हफ्ते से अधिक समय तक समुद्र में घूमता रहा था।
अमेरिकी कार्रवाई के बाद रूस की संसद के वरिष्ठ सदस्य और रक्षा समिति के उपाध्यक्ष एलेक्सी जुरावलेव ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। टेलीग्राम पर जारी अपने बयान में जुरावलेव ने इस कार्रवाई को रूस की संप्रभुता पर सीधा हमला बताया। उन्होंने कहा कि जिस जहाज पर रूसी राष्ट्रीय ध्वज लहरा रहा हो, उस पर कब्जा करना रूसी क्षेत्र पर हमले के समान है।
जुरावलेव ने कहा कि अमेरिका की इस हरकत का जवाब सिर्फ कूटनीति से नहीं, बल्कि सैन्य कार्रवाई से दिया जाना चाहिए। उन्होंने यहां तक सुझाव दिया कि अमेरिकी ऑपरेशन में शामिल तटरक्षक बल की नौकाओं पर टॉरपीडो हमला किया जाए और उन्हें डुबो दिया जाए। उनके मुताबिक, अमेरिका को रोकने का यही एकमात्र तरीका है।
रूसी सांसद ने हाल ही में वेनेजुएला में अमेरिकी अभियानों का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि अमेरिका लगातार मनमानी कर रहा है और अंतरराष्ट्रीय नियमों की अनदेखी कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक सशस्त्र अमेरिकी बेड़े द्वारा नागरिक तेल टैंकर पर कब्जा करना समुद्री डकैती का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
सबसे चिंताजनक बयान तब आया, जब जुरावलेव ने रूस के सैन्य सिद्धांत का हवाला दिया। उन्होंने दावा किया कि रूस का सैन्य सिद्धांत राष्ट्रीय हितों पर हमले की स्थिति में परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की अनुमति देता है। उन्होंने कहा कि ऐसी परिस्थिति में रूस को पीछे नहीं हटना चाहिए और सख्त से सख्त कदम उठाने चाहिए।
इस बयान ने दुनिया भर में चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रूस और अमेरिका दोनों ही परमाणु हथियारों से लैस महाशक्तियां हैं। पहले से ही यूक्रेन युद्ध, नाटो विस्तार और प्रतिबंधों को लेकर दोनों देशों के रिश्ते बेहद तनावपूर्ण हैं। ऐसे में समुद्र में टैंकर की जब्ती और उसके बाद रूस की ओर से आई यह धमकी हालात को और विस्फोटक बना सकती है।
फिलहाल अमेरिका की ओर से इस मामले पर कोई तीखी प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है, लेकिन जानकारों का मानना है कि यह घटना आने वाले दिनों में वैश्विक कूटनीति और सुरक्षा संतुलन पर गहरा असर डाल सकती है। एक तेल टैंकर की जब्ती अब सिर्फ कानूनी या व्यापारिक मुद्दा नहीं रही, बल्कि यह महाशक्तियों के बीच शक्ति प्रदर्शन का नया मोर्चा बनती नजर आ रही है।