क्या डोनाल्ड ट्रंप को राष्ट्रपति पद से हटाने की तैयारी हो रही है? क्या अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर महाभियोग का डर सता रहा है? और अगर सता रहा है तो क्यों? ट्रंप ने खुद ऐसा क्या कह दिया की अब राष्ट्रपति पद से हटने की चर्चाएं तेज हो गई है। क्या 2026 के मध्यावधि चुनाव यानी की Midterm Polls ट्रंप के राजनीतिक भविष्य का फैसला करेंगे? और क्या वेनेजुएला में अमेरिकी कार्रवाई अब वॉशिंगटन की सत्ता की लड़ाई को और भड़का देगी? आज अमेरिकी राजनीति में उठते इन्हीं सवालों के जवाब तलाशेंगे इस रिपोर्ट में।
अमेरिका की राजनीति इन दिनों कई मोर्चों पर उथल-पुथल से गुजर रही है। एक ओर वेनेजुएला को लेकर अमेरिकी कार्रवाई पर पूरी दुनिया की नजर टिकी है, तो दूसरी ओर देश के भीतर 2026 में होने वाले मध्यावधि चुनावों को लेकर सियासी पारा लगातार चढ़ता जा रहा है। इसी बीच राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेचैनी अब खुलकर सामने आ गई है। ट्रंप को डर है कि अगर इस चुनाव में रिपब्लिकन पार्टी को हार मिली, तो उन्हें एक बार फिर महाभियोग का सामना करना पड़ सकता है।
यह चिंता ट्रंप ने किसी बंद कमरे में नहीं, बल्कि सार्वजनिक मंच से जाहिर की। मंगलवार को हाउस रिपब्लिकन कॉकेस रिट्रीट में बोलते हुए ट्रंप ने साफ शब्दों में कहा कि 2026 के मध्यावधि चुनाव उनके लिए “जीत या संकट” जैसे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर रिपब्लिकन पार्टी नवंबर में हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर नियंत्रण बनाए रखने में नाकाम रही, तो डेमोक्रेट्स उनके खिलाफ महाभियोग का कारण ढूंढ लेंगे।
अपने संबोधन में ट्रंप ने रिपब्लिकन सांसदों और नेताओं से अपील करते हुए कहा, “आपको यह चुनाव जीतना ही होगा। अगर हम मध्यावधि हार गए, तो डेमोक्रेट्स मुझे महाभियोग के जरिए हटाने की कोशिश करेंगे।” ट्रंप ने इसे सिर्फ राजनीतिक लड़ाई नहीं, बल्कि अपने राष्ट्रपति पद की सुरक्षा से जोड़कर देखा। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि अमेरिकी इतिहास में अक्सर सत्ताधारी राष्ट्रपति की पार्टी को मध्यावधि चुनावों में नुकसान उठाना पड़ता है।
ट्रंप ने अपने भाषण में जनता के मूड और अर्थव्यवस्था को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि भले ही उनकी सरकार को वे सफल मानते हों, लेकिन जनता की सोच को समझना आसान नहीं है। “लोग कहते हैं कि राष्ट्रपति बनने के बाद मध्यावधि चुनाव हार जाते हैं। आप लोग इस खेल में मुझसे ज्यादा अनुभवी हैं, लेकिन मुझे समझ नहीं आता कि जनता के मन में क्या चल रहा है,”- ट्रंप ने कहा।
यह बयान साफ करता है कि ट्रंप को बढ़ती महंगाई, अंतरराष्ट्रीय तनाव और घरेलू असंतोष का असर चुनावी नतीजों पर पड़ने का डर है।
दूसरी ओर, 2026 के मध्यावधि चुनाव को लेकर डेमोक्रेटिक पार्टी में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी नेताओं को उम्मीद है कि वे इस चुनाव के जरिए हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स पर दोबारा कब्जा कर सकते हैं। हालांकि, डेमोक्रेट्स की बड़ी जीत तय मानी नहीं जा रही, लेकिन मौजूदा राजनीतिक माहौल को पार्टी अपने पक्ष में मान रही है।
इससे पहले हाउस स्पीकर माइक जॉनसन भी रिपब्लिकन खेमे को चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने कहा था कि अगर रिपब्लिकन पार्टी हाउस का बहुमत खो देती है, तो “रेडिकल लेफ्ट” ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया शुरू कर देगी।
जॉनसन ने साफ कहा था, “अगर हमने बहुमत गंवाया, तो राजनीतिक अस्थिरता बढ़ेगी। हमें ऐसा होने से रोकना होगा।”
गौर करने वाली बात यह है कि ट्रंप इससे पहले भी दो बार महाभियोग का सामना कर चुके हैं। पहली बार 2019 में, जब डेमोक्रेट्स के नियंत्रण वाले हाउस ने उन पर महाभियोग चलाया। दूसरी बार 2021 में, उनके पहले कार्यकाल के आखिरी दिनों में। हालांकि दोनों ही मामलों में सीनेट से उन्हें बरी कर दिया गया था।
सूत्रों के मुताबिक, ट्रंप की मौजूदा चिंता का एक बड़ा कारण वेनेजुएला में अमेरिकी ऑपरेशन भी है। हाल ही में कुछ डेमोक्रेट नेताओं ने इस कार्रवाई को लेकर ट्रंप के खिलाफ महाभियोग की संभावना जताई है। यही वजह है कि ट्रंप अब मध्यावधि चुनाव को सीधे अपने राजनीतिक अस्तित्व से जोड़कर देख रहे हैं।
कुल मिलाकर, अमेरिका में सियासी जंग अब तेज हो चुकी है। 2026 का मध्यावधि चुनाव सिर्फ हाउस का संतुलन नहीं तय करेगा, बल्कि यह भी तय कर सकता है कि डोनाल्ड ट्रंप एक बार फिर महाभियोग के भंवर में फंसेंगे या राजनीतिक तौर पर मजबूत होकर उभरेंगे। अब सबकी नजर नवंबर के चुनावी मैदान पर टिकी है, जहां अमेरिका की सत्ता की अगली कहानी लिखी जाएगी।