फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UN में जयशंकर ने पाकिस्तान फंडेड आतंक की खोल दी पोल, पाकिस्तान को खूब लताड़ा

Sun, 27 Sep 2026 12:24 AM IST
Adarsh Jha अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम

दुनिया के सबसे बड़े कूटनीतिक मंच से भारत ने एक बार फिर आतंकवाद, युद्ध और वैश्विक अस्थिरता पर अपना रुख साफ कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र अपने गठन के नौवें दशक में पहुंच चुका है, लेकिन दुनिया आज भी संघर्ष और टकराव से जूझ रही है। जिस संगठन का मकसद अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा कायम करना था, उसके सामने आज भी बड़ी चुनौतियां मौजूद हैं।

जयशंकर ने कहा कि युद्ध का असर सिर्फ युद्ध वाले इलाके तक सीमित नहीं रहता। किसी एक हिस्से में होने वाला संघर्ष वैश्विक अर्थव्यवस्था, व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और विकास को प्रभावित करता है। शांति बनाए रखने में नाकामी का सीधा असर दुनिया की प्रगति पर पड़ रहा है। यानी युद्ध सिर्फ जान-माल का नुकसान नहीं करता, बल्कि विकास की रफ्तार भी रोकता है।

यूएनजीए के मंच से जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में जारी संघर्ष का भी जिक्र किया। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्गों से गुजरने वाले वाणिज्यिक जहाजों पर हो रहे हमलों को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और नागरिकों के साथ-साथ समुद्री यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की।

विदेश मंत्री ने शांति को लेकर भी भारत का नजरिया सामने रखा। उन्होंने कहा कि शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का न होना नहीं है। अगर दुनिया लगातार खतरों, दबावों और अस्थिरता के बीच खड़ी है, तो वह वास्तविक शांति नहीं है। जयशंकर के मुताबिक स्थिरता, सुरक्षा और स्थिति में स्पष्टता मजबूत करना जरूरी है, क्योंकि यही शांति के लिए जरूरी माहौल तैयार करते हैं।

आतंकवाद के मुद्दे पर भी भारत ने अपना सख्त रुख दोहराया। जयशंकर ने कहा कि आतंकवाद वैश्विक शांति के लिए लगातार बना हुआ खतरा है। खास तौर पर तब, जब किसी आतंकवादी गतिविधि को किसी राज्य का समर्थन हासिल हो और उसका उद्देश्य सीमा पार गतिविधियों से जुड़ा हो। उन्होंने कहा कि ऐसे कृत्यों में शामिल सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए।

जयशंकर ने आतंकवाद के वित्तपोषण पर भी अंतरराष्ट्रीय कार्रवाई की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि आतंकवाद को मिलने वाली आर्थिक मदद को उजागर करने के साथ-साथ उसके वित्तीय स्रोतों को रोकना भी जरूरी है। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति को दोहराते हुए अंतरराष्ट्रीय समुदाय से दृढ़ और समन्वित कार्रवाई का आह्वान किया।

वहीं, भारत ने खुद को सिर्फ चुनौतियों का सामना करने वाले देश के तौर पर नहीं, बल्कि वैश्विक समाधान में योगदान देने वाले देश के तौर पर भी पेश किया। जयशंकर ने कहा कि भारत के पास दुनिया को देने के लिए बहुत कुछ है। डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, बेहतर शासन, तेज बुनियादी ढांचा विकास, स्टार्टअप और नवाचार की संस्कृति भारत की प्रगति के महत्वपूर्ण आधार हैं।

उन्होंने बताया कि भारत 78 देशों में करीब 600 प्रमुख विकास परियोजनाओं पर काम कर रहा है। इन परियोजनाओं का दायरा बुनियादी ढांचे और विनिर्माण से लेकर कृषि तक फैला हुआ है। भारत का कहना है कि उसके विकास के अनुभव और उपलब्धियां ग्लोबल साउथ के दूसरे देशों के लिए भी उपयोगी हो सकती हैं।

आखिर में जयशंकर ने आत्मरक्षा के अधिकार और युद्ध समाप्त करने, दोनों संदेशों को साथ रखा। उन्होंने कहा कि आतंकवाद के खिलाफ भारत अपने आत्मरक्षा के अधिकार का प्रयोग करेगा। साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि अंतहीन युद्ध अब समाप्त होना चाहिए। दुनिया को युद्ध जारी रखने की नहीं, बल्कि युद्ध के अंत की दिशा में आगे बढ़ने की जरूरत है।

विज्ञापन

Latest

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
AU ऐप में पढ़ें