मन में कुछ करने का जुनून हो तो गरीबी भी आड़े नहीं आती है। मजदूर के बेटे प्रेम कुमार ने प्रदेश की सूची में जगह बनाकर इस कथन को सार्थक कर दिखाया। फटे जूते और घिसी पुरानी ड्रेस में स्कूल जाने से भी गुरेज नहीं किया। माता-पिता से भी जिद नहीं की। ग्राम रौशनपुर मुरादाबाद निवासी ब्रजेश सिंह कई साल से गिरीताल क्षेत्र में परिवार के साथ किराये पर रहते हैं। वह टांडा उज्जैन स्थित एक जनरल स्टोर में काम करते हैं। शनिवार को उनके बेटे प्रेम कुमार ने अपनी मेहनत के दम पर 10वीं में प्रदेश की सूची में 18वीं रैंक हासिल की। शौर्य ने बताया कि वह रोजाना करीब पांच घंटे अभ्यास करता था। घर में टीवी नहीं है, ऐसे में मनोरंजन के लिए प्रेम कुछ देर ग्राउंड में खेलकर दोबारा पढ़ाई में जुट जाता था। उसकी बड़ी बहनें शिल्पा और दीना निजी अस्पताल में काम करके परिवार चलाने में सहयोग करती हैं। छोटा भाई प्रीतम भी इसी स्कूल में कक्षा चार का छात्र है। माता पार्वती देवी कहती हैं कि दो बच्चे स्कूल में पढ़ते हैं, गरीब परिवार को देखते हुए शुल्क माफ करनी चाहिए।