उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में अवैध शराब का बढ़ता चलन अब केवल एक सामाजिक बुराई नहीं, बल्कि परिवारों के विनाश का कारण बन गया है। इस गंभीर संकट से त्रस्त होकर नाग पूर्वीयाणा की महिलाओं ने अब सीधे सड़क पर उतरकर मोर्चा खोल दिया है। शराबियों और अवैध शराब तस्करों की वजह से गाँव की खराब होती फिजा और युवाओं के डूबते भविष्य को बचाने के लिए मातृशक्ति ने हुंकार भरी है। इसी क्रम में ग्राम पंचायत भवन में ग्राम प्रधान विजय पंत की अध्यक्षता में एक निर्णायक बैठक संपन्न हुई, जिसमें नशे के सौदागरों पर नकेल कसने के लिए ऐतिहासिक निर्णय लिए गए। बैठक में ग्राम प्रधान ने स्पष्ट किया कि जो लोग अवैध शराब बेचकर गाँव के नवयुवकों को नशे के दलदल में धकेल रहे हैं और पारिवारिक कलह का बीजारोपण कर रहे हैं, उन्हें अब बख्शा नहीं जाएगा। निर्णय लिया गया है कि महिला मंगल दल, युवक मंगल दल और सामाजिक संगठन पहले ऐसे लोगों से आग्रह करेंगे। यदि इसके बाद भी तस्करी नहीं रुकी, तो अवैध शराब बेचने वालों पर ₹51,000 का भारी जुर्माना लगाया जाएगा। साथ ही, प्रशासन की मदद से तस्करी में लिप्त लोगों की पहचान कर उन्हें दंडित करने की कठोर कार्यवाही की जाएगी। महिला मंगल दल की अध्यक्ष सुनीता देवी ने पहाड़ की एक और दुखती रग पर हाथ रखते हुए घोषणा की कि अब गाँव के किसी भी मांगलिक या सार्वजनिक कार्यक्रम में शराब नहीं परोसी जाएगी। यदि कोई इस नियम का उल्लंघन करता पाया गया, तो उस पर ₹11,000 का अर्थदंड लगाया जाएगा। महिलाओं का मानना है कि उत्सवों में शराब की उपस्थिति सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने और नई पीढ़ी को गलत संदेश देने का मुख्य जरिया बन गई है।