लोकल फॉर वोकल अभियान के तहत को जनपद में मौजूद महिला स्वयं सहायता समूहों द्वारा प्राकृतिक एवं हर्बल रंगों सहित होली की मिठाई गुजिया का निर्माण किया जा रहा है। वहीं जवाड़ी, कुमोली, मायकोटी, मेदनपुर एवं ऊखीमठ क्षेत्र के गांवों में महिलाएं प्राकृतिक संसाधनों से हर्बल रंग तैयार कर रही हैं। साथ ही इन रंगों को जनपद मुख्यालय, आसपास के स्थानीय बाजारों तथा विकास भवन सहित हिलान्स आउट लेट के माध्यम से बेचा जा रहा है। इससे महिलाएं स्वरोजगार से जुड़े रही हैं वहीं रसायनयुक्त रंगों से दूर रहने का संदेश भी दे रही हैं। महिलाओं द्वारा पालक से हरा रंग, हल्दी से पीला रंग, चुकंदर से गुलाबी एवं लाल रंग तथा गेंदा फूल से केसरिया रंग तैयार किए जा रहे हैं। इन प्राकृतिक रंगों की बाजार में अच्छी मांग देखने को मिल रही है। ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान के निदेशक अनूप कुमार, ने बताया कि प्राकृतिक रंगों के विक्रय से महिलाओं की आय में वृद्धि होगी तथा यह पहल स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने लोगों से होली पर्व पर स्वदेशी एवं प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग कर महिलाओं को आर्थिक रूप से लाभ पहुंचाने की अपील की है। हर्बल रंग बना रही संगीता , मोनिका कप्रवाण निवासी , जवाड़ी गांव ने बताया कि हर्बल रंग बनाने से हमें घर बैठे रोजगार मिला है। लोग हमारे बनाए रंगों को पसंद कर रहे हैं और हमें अपनी मेहनत का अच्छा लाभ मिल रहा है।