जाखधार में आयोजित जाख मेले में धधकते अंगारों पर जाख देवता के पश्वा ने देवनृत्य किया। यह देखकर पूरा क्षेत्र जाख देवता के जयकारों से गूंज उठा। गुप्तकाशी से करीब पांच किलोमीटर दूर स्थित जाखधार मंदिर में आयोजित जाख मेले को देखने के लिए जिलेभर से श्रद्धालु पहुंचे। परंपरा के अनुसार बैसाख संक्रांति पर जंगल से चिह्नित लकड़ियों को लाकर यहां विधिविधान से अग्नि प्रज्जवलित किया गया और पूरी रात चार पहर पूजा के साथ धधकती रही। बुधवार को द्वितीया तिथि को नारायणकोटी से पश्वा प्रकाश सिंह राणा गाजे-बाजे के साथ कोठेड़ा, देवशाल और विन्ध्यवासिनी मंदिर होते हुए जाखधार मंदिर पहुंचे। मंदिर परिसर में ढोल-दमाऊं और जागरों के बीच जाख देवता अवतरित हुए और धधकते अंगारों पर देवनृत्य किया। आचार्य हरिओम देवशाली, मनोहर देवशाली और महेंद्र देवशाली ने कहा कि जाख देवता को पूरी केदारघाटी का रक्षक माना जाता है।