जिला शिक्षण एवं प्रशिक्षण संस्थान रतूड़ा में मंगलवार को बालिका संवेदीकरण कार्यक्रम के तहत जिला स्तरीय प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति के अंतर्गत स्थानीय परंपराओं, पहनावे और व्यंजनों को बढ़ावा देने की पहल पर आधारित था। इसमें जिले के तीनों विकासखंडों से माध्यमिक स्तर की कक्षा नवीं से बारहवीं की 12 विद्यालयों की छात्राओं ने प्रतिभाग किया। प्रतियोगिता के लिए छात्राएं उत्तराखंड की खूबसूरत संस्कृति को दर्शाती रंग-बिरंगे परिधानों में आए हुए थे। वहीं पारंपरिक खानपान प्रतियोगिता में छात्राओं द्वारा उत्तराखंड के पहाड़ी व्यंजनों को खूबसूरती से दर्शाया, इसमें झगोरे की खीर, चौसा, गहत की रोटी आदि व्यंजनों को पेश किया गया। प्रतियोगिता में प्रतिभाग कर रही वैष्णवी, अंजली, ईशिका और शिवानी ने बताया की उन्हें उत्तराखंड की इन परिधानों को पहन कर खुशी हो रही है, इससे हमारी संस्कृति का भी संरक्षण हो रहा है। डाइट के प्रभारी प्राचार्य हरि वल्लभ डिमरी ने बताया कि केंद्र सरकार की शिक्षा नीति के पहल पर यह कार्यक्रम आयोजित हुआ। उन्होंने कहा कि आने वाली पीढ़ी को आधुनिकता के साथ लोक संस्कृति को भी सहेजना है इसलिए इस तरह के कार्यक्रम जरूरी हैं। कार्यक्रम में न सिर्फ बच्चों द्वारा हमारी लोक संस्कृति को खूबसूरती से दर्शाया है बल्कि इससे अन्य लोगों को भी संस्कृति समाज पहनावे, खानपान और रीति रिवाजों को सहेजने के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। कार्यक्रम की कॉर्डिनेटर प्रवक्ता भुवनेश्वरी चंदानी ने बताया कि बालिकाएं लोक संस्कृति और समाज के निर्माण में संवाहक होती हैं और इस तरह के कार्यक्रमों से बालिकाएं इन परंपराओं को समझने और संवारने का कार्य करेंगी। कहा कि आगे भी इस तरह के कार्यक्रम जारी रहेंगे। कार्यक्रम में स्कूली छात्राओं और शिक्षकों की अहम भागीदारी रही।