पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत अचानक जौलीग्रांट की रामलीला में पहुंचे। उन्होंने मंच से लोगों से रामचंद्र की जय और बजरंगबली की जय के नारे लगावाए। हरीश रावत ने कहा कि भगवान विष्णु के अवतार राम त्रेता से आधा कलयुग बीतने तक हमारे साथ हैं। उनकी ओर से स्थापित मर्यादाएं ही सनातन हैं। दुनिया में सबसे अधिक राम ने ही मां ही मर्यादा को स्थापित किया है। श्रवण कुमार के वध पर उसके माता-पिता ने राजा दशरथ को पुत्र वियोग का श्राप दिया था। यदि राम को सबसे अधिक दुलार करने वाली माता कैकेयी राम के लिए 14 वर्ष का वनवास नहीं मांगती तो संभव था कि श्राप के अनुसार दशरथ के किसी पुत्र की मृत्यु हो सकती थी। लक्ष्मण और सीता महल छोड़कर अपने भाई और पति के साथ वन चले गए। वहीं भरत ने 14 वर्ष तक सिंहासन पर राम की खड़ाऊं रखकर राजपाठ चलाया। रावण महापंडित था। उसे पता था कि उसके राक्षस कुल के पापों का घड़ा भर चुका है। इसलिए उसके अपने कुल के उद्धार के लिए राम से युद्ध किया। मरते हुए रावण से लक्ष्मण ने पैरों की तरफ बैठकर दीक्षा ली। जो रावण संहिता के रूप में सुरक्षित है। हरीश रावत ने रामलीला के मंच से मोटे अनाजों और पारंपरिक व्यंजनों का प्रचार करते हुए कहा कि अरसे, रोटाना, फाणू घरों में बनते रहना चाहिए। इससे स्वास्थ्य और परंपराएं दोनों बचेंगी। कहा कि जौलीग्रांट की रामलीला का 60वें वर्ष में प्रवेश होना अद्भुत है।