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Pithoragarh: पूर्व सैनिकों ने उत्साह के साथ मनाया बंगाल इंजीनियर का स्थापना दिवस

पिथौरागढ़ में पूर्व सैनिकों ने बंगाल इंजीनियर का स्थापना दिवस उत्साह के साथ मनाया। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने बंगाल इंजीनियर के इतिहास को याद करते हुए झोड़ा-चांयरी का गायन किया। इन लोकगीतों की धुन पर पूर्व सैनिक जमकर थिरके। शनिवार को नगर के एक निजी होटल में पूर्व सैनिकों ने बंगाल इंजीनियर के 233 वे स्थापना दिवस पर केक काटा और एक-दूसरे को खिलाते हुए बधाई दी। इस दौरान बंगाल इंजीनियर के सैनिकों की वीरता को याद कर शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई। पूर्व सैनिकों ने कहा कि वर्ष 1803 में कानपुर में बंगाल पायनियर्स की स्थापना की गई। 1808 में कंपनी ऑफ माइनर्स को इसमें मिलाया गया। वर्ष 1819 में इसका नाम बदलकर बंगाल सैपर्स एंड माइनर्स रखा गया। 1853 में रेजीमेंट का मुख्यालय रुड़की छावनी में स्थानांतरित किया गया जो आम भी इस रेजीमेंट का केंद्र है। वर्ष 1903 में इस रेजीमेंट को प्रथम सैपर्स एंड माइनर्स के नाम से पहचान मिली। आजादी के बाद वर्ष 1947 में यह रेजीमेंट भारतीय सेना की इंजीनियर कोर का हिस्सा बन गई। वर्ष 1989 में तत्कालीन राष्ट्रपति आर वेंकटरमण ने रुड़की में आयोजित समारोह में बंगाल इंजीनियर ग्रुप को रेजीमेंट कलर्स प्रदान किया जो इसकी वीरता और गौरव का प्रतीक है। इस दौरान पूर्व सैनिकों ने सोला सोल्यानी, त्यारा गाला जंजीर कुमाऊंनी गीत पर जमकर नृत्य किया। उन्होंने देश भक्ति गीतों का भी गायन किया। इस मौके पर दिवाकर सिंह, धीरज सिंह जोरा, प्रकाश लाल, देव सिंह गोबाड़ी, सुरेश पांडे, जोगा सिंह दीवानी चंद, मिलाप बिष्ट, उमेश फुलेरा, सुदंर खड़ायत सहित कई पूर्व सैनिक शामिल रहे। समापन पर बुजुर्ग पूर्व सैनिक बहादुर सिंह रावल, जगत चंद शाही, चंचल सिंह, गिरधर सिंह, रमेश गिरी और अंतरराष्ट्रीय मुक्केबाज कल्याण वल्दिया को शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया।

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