खाद्यान्न गोदामों में धर्मकांटे न लगने से उन्हें बगैर तौल के राशन मिल रहा है। गल्ला विक्रेताओं का कहना है कि हर बोरी में मानकों से कम राशन होने से उनके लिए इसकी भरपाई करना मुश्किल हो गया है और सरकार दाने-दाने का हिसाब मांग रही है। खाद्यान्न गोदामों से उन्हें मानकों के अनुसार राशन तोलकर मिलना चाहिए। उन्होंने प्रदर्शन करते हुए कहा जब तक गोदामों में धर्मकांटे नहीं लगाए जाते वे राशन वितरण नहीं करेंगे। सस्ता गल्ला विक्रेताओं ने संगठन के जिलाध्यक्ष मनोज पांडे के नेतृत्व में जिला पूर्ति कार्यालय में प्रदर्शन करते हुए कहा कि वे लंबे समय से मानदेय, खाद्यान्न गोदामों में धर्मकांटे लगाने और लंबित बिलों के भुगतान की मांग कर रहे हैं। सबसे अधिक दिक्कत खाद्यान्न गोदामों में धर्मकांटे न लगने से हो रही है। उन्हें बगैर तौल के राशन दिया जा रहा है जो बोरों में मानकों के अनुसार कम है। गोदामों से उन्हें कम राशन मिल रहा है और इसके बाद भी सरकार उनसे दाने-दाने का हिसाब मांग रही है। उन्होंने कहा कि पहले सभी खाद्यान्न गोदामों में धर्मकांटे लगने चाहिए। इसके बाद ही वे ई-पास मशीन के जरिये राशन वितरण करेंगे। कहा कि उन्होंने मांगों के पूरा होने तक उन्होंने राशन वितरण बंद करने का फैसला लिया है तो सरकार उन्हें नोटिस देकर उत्पीड़न कर रही है। चेतावनी दी कि मांगों के पूरा होने तक वे राशन वितरण नहीं करेंगे। प्रदर्शन करने वालों में कैलाश जोशी, कमल टम्टा, भगवती प्रसाद, हयात सिंह, महिमन भट्ट, मुकेश भट्ट आदि सस्ता गल्ला विक्रेता रहे।