पिरूल जंगलों में आग लगने का कारण नहीं बनेगा बल्कि यह अब स्वरोजगार का नया विकल्प बन गया है। इस साल पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में बनाए गए पिरूल कलेक्शन एवं बायोमास पैलेट योजना में समूहों की महिलाओं ने उत्कृष्ट प्रदशर्न करते हुए 2 करोड़ से अधिक का व्यापार किया है। जिसमें 60- 65 लाख समूहों की महिलाओं को लाभांश प्राप्त हुआ। वहीं जंगलाें में पिरूल नहीं होने से इस बार आंग की घटनाओं पर अंकुश भी लगा। ग्रामोत्थान परियोजना (रीप) की दूरदर्शी योजना के चलते पिरूल (चीड़ की सूखी पत्ती) वनाग्नि के बजाय समूहों की आर्थिकी का बेहतर जरिया बनकर उभरा है। रीप की पहल पर नैनीडांडा ब्लॉक में शुरू किए गए पिरूल कलेक्शन एवं बायोमास पैलेट प्रोजेक्ट योजना से नई पहल फेडरेशन से जुड़ी सैकड़ों महिला स्वयं सहायता समूहों की आर्थिकी भी बेहतर हुई है। इस प्रोजेक्ट से फेडरेशन ने अभी तक करीब 15 हजार क्विंटल पिरूल बेचकर 2.10 करोड़ का व्यापार कर लिया है।