पर्वतीय सांस्कृतिक उत्थान मंच हीरानगर में उत्तरायणी महोत्सव में शुक्रवार को दिन में बच्चों की चम्मच दौड़, जलेबी दौड़, कुमाऊंनी भाषण प्रतियोगिता हुई। शाम को लोकगीत, लोक नृत्य के बाद सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक गायकों ने खूब रंग जमाया। दिनभर लोगों ने मेला परिसर से जमकर खरीदारी की। लोगों ने तरह-तरह के पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद भी लिया। लोक गायक नैननाथ रावल ने बसंती तेरी गुलाबी साड़ी, क्रीम पौडरा घिसनी किलै न और ना बांसा घुघुती घुरा घुरा मेरी गाकर समा बांध दिया। संजय पथनी ने ठंडो पाणी मिठो बाणी, जौहार मुनस्यारा और यो पहाड़ा बसीगो मेरो पराणा गाकर वाहवाही लूटी। सांस्कृतिक कार्यक्रम देर शाम तक चले। संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम का शुभारंभ लक्ष्मण सिंह लमगड़िया ने किया। वहां हितेश सुयाल, संरक्षक हुकुम सिंह कुंवर, अध्यक्ष खड़क सिंह बगडवाल, उपाध्यक्ष गोपाल सिंह बिष्ट, सचिव देवेंद्र तोलिया, कोषाध्यक्ष त्रिलोक बनौली, शिक्षाविद प्रविंद्र कुमार रौतेला, कैलाश जोशी, शोभा बिष्ट, पुष्पा संभल, विमला संगुड़ी, निर्मला जोशी, भुवन जोशी, मोहिनी रावत, चंद्रशेखर परगाई, धर्म सिंह बिष्ट आदि रहे।