नैनीताल में बीते आठ दिनों से चल रही भारत शुद्धिकरण यात्रा नवें दिन बृहस्पतिवार को नैनीताल पहुंची। मल्लीताल पंत पार्क में यात्रा मार्ग को लेकर हुए विवाद के बाद पहले यात्रा में शामिल संंतों व अन्य ने एक घंटा सड़क पर बैठक कर विरोध जताया। इसके बाद भारत शुद्धिकरण यात्रा को स्थगित कर दिया गया। संतो ने लिया संकल्प लिया कि अब अब मुख्यमंत्री की अनुमति के बाद नैनीताल से फिर यात्रा की शुरूआत की जाएगी। संतो ने यहां खेल मैदान में बनाए गए मंच पर लोगों को भारत शुद्धिकरण यात्रा के बारे में बताया। जगतगुरु चित्रगुप्ताचार्य डॉ. स्वामी सच्चिदानन्द के नेतृत्व में जागेश्वर, चितई गोलू मंदिर, अल्मोड़ा नंदा देवी, काकड़ीघाट, खैरना, कैंची नीम करौली बाबा मंदिर, भवाली होते हुए बृहस्पतिवार को नैनीताल पहुंची। यात्रा तल्लीताल डांठ से मॉलरोड होते हुए मल्लीताल पंत पार्क पहुंची। जहां संत व यात्री बाजार से जाने लगे लेकिन पुलिस उनसे नयना मंदिर द्वार से जाने को कहने लगे। इससे आक्रोषित संत मार्ग पर ही बैठ गए। हालांकि चौड़ा मार्ग होने के कारण वाहन संचालन सुचारू रहा। यहां डॉ. स्वामी सच्चिदानन्द ने कहा कि पुलिस प्रशासन ने सनातन देश में सनातनियों का मार्ग रोका है। जबकि अल्मोड़ा, भवाली आदि स्थानों पर प्रशासन ने सहयोग किया और यात्रा बाजारों में भी गई। सवाल किया कि नैनीताल में उन्हें बाजार जाने से क्यों रोका जा रहा है। भारत शुद्धिकरण यात्रा भारत को जिहादी मानसिकता से मुक्त कराने, धर्मांतरण, भूमि जिहाद, थूक जिहाद के खिलाफ है। भारत के भविष्य के संकट को देखते हुए संतों ने मठों को त्याग दिया है। उन्होंने देश के तमिलनाडु में स्थित मंदिर की ज्योत को लेकर जज के आदेश तथा 20 राजनीतिक दलों की ओर से उस जज को हटाने की मांग समेत बांग्लादेश में हिंदुओं के अत्याचार का जिक्र किया। दर्जा मंत्री दिनेश आर्या ने भी संतों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने। लगभग एक घंटे बाद संतों ने यात्रा स्थगित की तथा खेल मैदान में बने मंच में सूक्ष्म सभा की। कहा कि अब मुख्यमंत्री के आदेश पर पहले बाजार, फिर नयना देवी मंदि से यात्रा शुरु होगी। दिल्ली में इसका समापन होगा। जहां दिल्ली का नाम इंद्रप्रस्त के नाम पर रखे जाने तथा विभिन्न मार्ग से आतताईयों के नाम हटाकर पौराणिक महाभारत, रामायण के पात्रों के नाम पर रखे जाने की मांग रखी जाएगी। आयोजन लालबाबा, भंडारी बाबा, हनुमान बाबा आदि रहे।