याैम-ए-आशरा यानी मुहर्रम की 10 तारीख को हल्द्वानी में ताजियों का जुलूस निकाला गया। जुलूस में सभी की जुबां पर या हुसैन की सदाएं थीं। जगह-जगह लंगर, सबील और मजलिसें आयोजित की गईं। मैदान-ए-करबला के वाकियात सुनकर हर आंख नम हो गई। शुक्रवार को जुमा की नमाज के बाद लाइन नंबर 13 में मस्जिद कुरैशियान के पास स्थित मैदान में सभी क्षेत्रों के ताजियेदार ताजिये लेकर एकजुट हो गए। उसके बाद लाइन नंबर 17 होते हुए कदीमी रास्तों से जुलूस गुजरा। इसमें छोटे-बड़े 55 ताजिये शामिल हुए। सबसे आगे दुलदुल बुराक का जोड़ा था। इंदिरा नगर और आजाद क्लब की नगाड़ा पार्टियों ने ढोल-नगाड़े बजाए। पाक पंजतन और शमशीर-ए-हैदरी अखाड़े के युवाओं ने गतके खेले और हैरतअंगेज करतब दिखाए। बच्चों का छोटा अखाड़ा भी जुलूस की शान बढ़ा रहा था। रात 10 बजे ताज चाैराहे पर दुआ के साथ जुलूस का समापन हुआ। इस दाैरान पुलिस बल तैनात रहा। उसके बाद ताजिये करबला ले जाए गए। इस बीच हाजी राशिद ने ताजिये बनाने वालों के साथ-साथ ढोल और अखाड़ों वालों को साफा पहनाकर सम्मानित किया। जुलूस को सफल बनाने में जमीर अहमद, शाहनवाज मलिक, कमर जहां कम्मो, इमरान साबरी, शमशाद हुसैन, जहीर अंसारी, मोहम्मद अकरम आदि ने सहयोग किया। सुबह से शाम तक चला लंगर हल्द्वानी। मुहर्रम के माैके पर जगह-जगह लंगर आयोजित किए गए। शरबत बांटा गया। 17 नंबर में ख्वाजा रजा कमेटी और गफ्फारी मस्जिद कमेटी ने सबील लगाई। कुरैशियान मस्जिद के पास व लाइन नंबर एक में भी लंगर बांटा। इसके अलावा वारसी काॅलोनी स्थित इमामबाड़ा में भी मजलिस लगी।