नैनीताल साहित्य महोत्सव में साहित्य और संस्कृति के रंगों से सराबोर एक सत्र के साथ ही साहित्य, मिथक कथाओं और सुरों का संगम देखने को मिला। वक्ताओं ने प्रकृति संरक्षण और पिंडर नदी के किनारे बसे गांवों के प्रकृति के प्रेम को बयां किया।रविवार को समापन के मौके पर मोहित सनवाल ने कालिदास और मल्लिका की प्रस्तुति दी। हिंदी रंगमंच के अमर नाटक आषाढ़ का एक दिन के प्रमुख अंशों का भावपूर्ण पाठ किया गया। गिरीश कर्नाड के तुगलक नाटक से एक प्रभावशाली संवाद भी प्रस्तुत किया।फेस्टिवल के संस्थापक और लेखनी फाउंडेशन के अध्यक्ष अमिताभ सिंह बघेल ने अतिथियों, लेखकों और विद्यार्थियों का स्वागत किया। इसके बाद सत्र नेचर ‘’स नैरेटिव्स: टू वाइल्डलाइफ बुक्स में लेखक अनिल बिष्ट और लेखक हरविजय सिंह बोरा ने रूडी सिंह के साथ संवाद किया। बिष्ट ने कहा कि प्रकृति के प्रति प्रेम ने उन्हें पिंडर नदी के किनारे बसे गांवों में लोगों को प्रकृति के संरक्षण के लिए जागरूक किया। उन्होंने आगामी पुस्तक में उत्तराखंड के वृक्षों पर कार्य करने की घोषणा की। मिथिक रियल्म्स में प्रसिद्ध लेखक आनंद नीलकंठन ने रामायण और महाभारत की विभिन्न परंपराओं व कथाओं के बारे में बताया। राजेश्वरी साईंनाथ ने उस्ताद सुलतान नियाजी की तबला संगत के साथ दो नृत्य प्रस्तुत किए। द आर्ट ऑफ सस्पेंस सत्र में लेखिका ऋचा एस. मुखर्जी ने भारतीय समाज में पश्चिमी प्रभावों पर व्यंग्यात्मक प्रकाश डाला। इनके अलावा कनिका त्रिपाठी, कामाक्षी खन्ना, हिंदी लेखिका प्रत्यक्षा, कनक रेखा चौहान, इतिहासकार पुष्पेश पंत, नवाब काजिम अली खान, सईद शेरवानी, टीसीए राघवन, ज्योत्सना मोहन, लेखिका शोभा डे आदि ने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन शीतल बिष्ट ने किया।