पर्यटन सीजन शुरू होते ही नैनीताल की यातायात व्यवस्था पूरी तरह पटरी से उतरती दिखाई दे रही है। शहर में लगातार लग रहे जाम व वाहनों की कतार से आम लोगों का जनजीवन प्रभावित हो रहा है, लेकिन प्रशासनिक दावे और तैयारियां जमीन पर नाकाम नजर आ रही हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर हर साल होने वाली ट्रैफिक बैठकों व प्लान का फायदा क्या है, जब एंबुलेंस और दमकल जैसे आपातकालीन वाहन भी जाम में फंस रहे हैं? बता दें कि बीते सोमवार को जंगल की आग बुझाने जा रही दमकल विभाग की गाड़ी कोतवाली के समीप लंबे जाम में फंस गई। वहीं मंगलवार को मॉलरोड पर लगे जाम में बीडी पांडे अस्पताल से मरीज को लेकर हल्द्वानी जा रही 108 एंबुलेंस करीब आधे घंटे तक फंसी रही। ऐसे में यदि मरीज की हालत गंभीर होती तो जिम्मेदारी कौन लेता? शहर में रोजाना लग रहे जाम से दफ्तर जाने वाले कर्मचारी, स्कूल पहुंचने वाले बच्चे और स्थानीय व्यापारी भी परेशान हैं। सुबह से शाम तक मॉलरोड, तल्लीताल, मल्लीताल और बारापत्थर क्षेत्र में वाहनों की लंबी कतारें आम हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले प्रशासन बड़ी-बड़ी बैठकें तो करता है, लेकिन उनका असर सड़क पर कहीं दिखाई नहीं देता। लोग सवाल उठा रहे हैं कि जब हर साल पर्यटन सीजन में भीड़ बढ़ने की जानकारी पहले से होती है तो पार्किंग, शटल सेवा, ट्रैफिक डायवर्जन और आपातकालीन वाहनों के लिए अलग कॉरिडोर जैसी व्यवस्थाएं समय रहते क्यों नहीं बनाई जाती। अगर जल्द ठोस कदम नहीं उठाए गए तो आने वाले दिनों में स्थिति और भयावह हो सकती है। खासकर कैंची धाम यात्रा और वीकेंड पर पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा सकती है।