चंपावत में रीसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम तकनीक छोटे किसानों के लिए मछली पालन का बेहतर विकल्प बन सकती है। करीब तीन करोड़ रुपये की लागत से तैयार हो रहे इस प्लांट में छह यूनिट बनाई गई हैं। प्रत्येक यूनिट में आरएएस तकनीक से जुड़े आवश्यक उपकरण लगाए गए हैं। इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य कम जमीन और सीमित पानी वाले क्षेत्रों में भी मछली पालन को बढ़ावा देना है। इसके जरिये कम जगह में अधिक उत्पादन किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, कोरवाट जैसी उच्च मूल्य वाली मछली की बाजार में कीमत करीब 600 रुपये प्रति किलो है। टैंक आधारित मछली पालन से छोटे किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं। केंद्र सरकार की योजनाओं के माध्यम से भी इस क्षेत्र को प्रोत्साहन दिया जा रहा है।