बागेश्वर में जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान में होली मिलन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। डीएलएड प्रशिक्षुओं ने एक-दूसरे को अबीर-गुलाल लगाकर होली गीत गाए। लोगों को आपसी वैमनस्य को भूलकर सौहार्द के साथ होली पर्व मनाने का संदेश दिया। शुक्रवार को सुबह से ही प्रशिक्षण संस्थान में होली मिलन कार्यक्रम की तैयारियां होने लगी थीं। पहले प्रशिक्षुओं ने अबीर-गुलाल के साथ होली खेली, जिसके बाद गायन की महफिल जमाई। प्रशिक्षुओं ने सिद्धि के दाता विघ्न विनाशन, होली खेले गिरिजापति नंदन गीत से होली गायन की शुरूआत की। झुकी आयो शहर में व्याेपारी, होली आई रे कन्हाई, आयो नवल बसंत सखी ऋतुराज कहायो आदि होली गीत प्रस्तुत कर मन मोहा। प्रशिक्षुओं ने कहा कि होली आपसी बैर भाव भुलाकर मेलजोल बढ़ाने और सभी को एक समान रंग में रंगने का त्योहार है। पूर्व से पहाड़ों में घर-घर में होली गायन होता था। बदलते समय में नशे आदि बुराइयों के कारण होली गायन की परंपरा कई स्थानों पर कम हो गई है। अपनी समृद्ध परंपरा को सहेजने और संवारने के लिए हमें ही पहल करनी होगी। डायट में इसी उद्देश्य के तहत कार्यक्रम किया गया है। इस मौके पर ललित धानक, मनीषा कनवाल, रितिका मेहता, अनिल रावत, आराध्या राणा, मनोज कुमार, आंचल, आरती, दीपा आदि मौजूद रहे।