महीनों से पेयजल संकट, टूटे आशियाने का मामूली मुआवजा और लटकते तारों से ग्रामीण परेशान जनसमस्याओं के समाधान के लिए कलक्ट्रेट पहुंचे पीड़ितों ने बयां की अपनी पीड़ा, प्रस्तावों और आश्वासनों की लेटलतीफी पर उठाए सवाल संवाद न्यूज एजेंसी बागेश्वर। जिले के ग्रामीण और दूर-दराज के क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का हाल बदहाल है। कहीं महीनों से पीने के पानी का संकट है, तो कहीं आपदा प्रभावितों को आशियाना दोबारा खड़ा करने के लिए महज ऊंट के मुंह में जीरे के समान मुआवजा मिल रहा है। विकास योजनाओं की कछुआ चाल और फाइलों में दबे प्रस्तावों के कारण ग्रामीण सालों-साल चक्कर काटने को मजबूर हैं। ऐसे ही तमाम गंभीर जनमुद्दों और अपनी व्यक्तिगत पीड़ा को लेकर सोमवार को जिले के विभिन्न क्षेत्रों से ग्रामीण जिला कार्यालय पहुंचे। प्रशासनिक अधिकारियों के सम्मुख पीड़ितों ने अपनी बात रखते हुए व्यवस्थाओं पर कई गंभीर सवाल खड़े किए।