मां विंध्यवासिनी मंदिर के प्रथम निकास द्वार पर बृहस्पतिवार को चांदी का गेट लगाया गया। बिहार के औरंगाबाद जिले के एक भक्त द्वारा चांदी का गेट व पत्तर मां के चरणों में समर्पित किया गया। दरवाजा और लगाए गए पत्तर का कुल वजन 76 किलो 800 ग्राम है। श्रीविंध्य पंडा समाज व जिला प्रशासन के अधिकारियों की अनुमति के बाद बृहस्पतिवार की शाम चार बजे से प्रथम निकास द्वार का दरवाजा बंद कर कार्य को शुरू हुआ। द्वितीय निकास द्वार से वीआईपी व आम श्रद्धालु के दर्शन पूजन का कार्य सुचारू रूप से चलता रहा। तीर्थ पुरोहित सूर्य प्रसाद मिश्रा फन्नर ने बताया कि विगत कई वर्षों से प्रतिमाह दानदाता औरंगाबाद निवासी व्यापारी रविंद्र कुमार सिंह परिवार के साथ दर्शन पूजन करने के लिए आते थे। मां के चरणों में सेवा भाव करने की जिज्ञासा उठी। उन्होंने 76 किलो 800 ग्राम का चांदी का गेट एवं पत्तर मां के चरणों में समर्पित किया। इससे प्रथम निकास द्वार पर दरवाजा व नीचे पत्थर पर चांदी का पत्तर लगाया गया। श्रीविंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने बताया कि मां विंध्यवासिनी के तीर्थ पुरोहित सूर्य प्रसाद मिश्रा के यजमान द्वारा मां के चरणों में चांदी का गेट समर्पित किया गया है। इसको लगवाने के लिए पंडा समाज कार्यकारिणी की बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया। जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन, एडीएम वित्त एवं राजस्व शिव प्रताप शुक्ल, नगर मजिस्ट्रेट द्वारा अनुमति लेने के पश्चात कार्य को शुरू किया गया। पहले यह द्वार पीतल का था।