अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर आदि योगी की नगरी पौराणिक काशी के सिंधिया घाट से नमामि गंगे और योगी वेद विज्ञान अध्ययन पीठ के वेदपाठी बटुकों ने विश्व को निरोग रखने का संदेश दिया। गंगा की लहरों की गूंज और वेद मंत्रों की धुन के बीच जब सूर्य देव सुबह की लालिमा बिखेर रहे थे तब गंगा तट पर योग और आस्था का एक अनोखा संगम साक्षात दिखाई पड़ा। नमामि गंगे और योगी वेद विज्ञान विद्यापीठ के तत्वावधान में आयोजित योग कार्यक्रम न केवल आध्यात्मिक जागरण का माध्यम बना, बल्कि इसने काशी की सांस्कृतिक आत्मा को भी झंकृत कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत मंत्रोच्चार और सामूहिक प्रार्थना से हुई। उसके बाद योगाभ्यास किया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला ने कहा कि गंगा की गोद में योग करना आत्मा की गहराइयों से जुड़ने जैसा है। योग हमें केवल स्वस्थ नहीं करता, यह हमें सजग, संयमी और सार्थक बनाता है। गंगा आरती और योग का यह समन्वय भारत की ऋषि परंपरा का जीवंत उदाहरण है।