वाराणसी। ज्योतिष्पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि भारतीय न्याय व्यवस्था धर्मशास्त्र के अनुकूल है। हम चाहते हैं कि संविधान के विशेषज्ञ और धर्म शास्त्र के जानकार दोनों मिलकर एक साथ बैठें। इससे दोनों में विरोधाभास समाप्त होगा। हमारी इच्छा है कि धर्म शास्त्र के मुकदमों को वाराणसी न्यायालय में धर्म शास्त्रों के अनुसार ही लड़ा जाए। वह शुक्रवार को केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में आशीर्वचन दे रहे थे। सेंट्रल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष मंगलेश दुबे और बनारस बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश तिवारी ने शंकराचार्य की चरण पादुका का पूजन कर आशीर्वाद लिया। मंगलेश दुबे ने कहा कि न्याय भी धर्म अंग है। समाज न्याय से वंचित होकर नहीं चल सकता है। इस दौरान पूर्व संयुक्त सचिव अजय पांडेय, न्याय सेवालय के डॉ. गिरीश चंद्र तिवारी, रमेश उपाध्याय, प्रजानाथ शर्मा, डॉ. साकेत शुक्ला, संजीव सिंह, सतीश कसेरा, डॉ. उमापति उपाध्याय, शिवकुमार पांडेय उपस्थित थे।