गंगा को सीवर के दबाव से मुक्त कराने के लिए गंगा प्रदूषण और नगर निगम के द्वारा नमो घाट स्थित शाही नाले को तो बंद कर दिया गया है, लेकिन करीब सप्ताह भर से शाही नाला से सीवर का पानी रिस कर गंगा नदी में गिर रहा है। यह रिसाव 24 घंटे लगातार हो रहा है। गौरतलब है कि शाही नाले पर सीवर के अतिरिक्त दबाव को कम करने के लिए शहर में अस्सी से कोनिया तक नई सीवर लाइन बिछाई गई है। जिसके बाद से नगर निगम का दावा है कि अब नमो घाट फेस टू/थ्री पर स्थित शाही नाला के निकास द्वार से मलजल गंगा नदी में नहीं गिरेगा, लेकिन शाही नाला की मौजूदा स्थिति इस दावे का पोल खोल रही है। वहीं नमो घाट के संचालन का जिम्मा लेने वाली प्राइवेट कंपनी (आरके वैदिक) के द्वारा भी इस स्थिति से नगर निगम को अवगत नहीं कराया जा रहा है। नमो घाट के निर्माण के बाद इस घाट के संचालन और देख-रेख का टेंडर फिलहाल आरके वैदिक कंपनी के पास है। आरके वैदिक कंपनी के द्वारा शाही नाला से निकल कर गंगा नदी में जा रहे मलजल के प्रति कोई गंभीरता नहीं दिखाई जा रही है।