नागरी प्रचारिणी सभा के इतिहास में दूसरी बार शास्त्री संगीत के पुरोधाओं और कलाकारों की मंडली बैठी। पद्मभूषण से सम्मानित पंडित साजन मिश्रा ने गायन से पहले कहा कि यह मल्हार का सीजन है। विलंबित रचना एक ताल में गौड़ मल्हार से गायन की शुरुआत की। ''काहें हो हमसो प्रीतम आंखे फेर लियो.....'' पर उनके आसमानी सुर सुन हर कोई हतप्रभ था। ''फिर बलमा बहार आए, जानी-जानी, मन की सब जानी बात....'' गाकर युवा दर्शकों को अपने काशी की सांगीतिक कला का मुरीद बना दिया। उनके साथ उनके बेटे पंडित स्वरांश मिश्र ने ऊंचे सुरों के साथ गायन कर जुगलबंदी की। उनके साथ हारमोनियम पर पंडित धर्मनाथ मिश्र और तबले पर राजेश मिश्र ने संगत की। इस प्रस्तुति से पहले 13 वर्ष की उम्र के बाल कलाकार शिवराज रवींद्र चाव्हाण ने पखावज बजाकर दर्शकों को हैरान कर दिया। हारमोनियम पर जुगलबंदी लोगों को काफी पसंद आई। पंडित विशाल कृष्णा ने कथक नृत्य कर नागरी प्रचारिणी सभा मंच की पहली प्रस्तुति दी। मोहित साहनी ने हारमोनियम पर संगत किया।