महान साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की जयंती के अवसर पर उनकी जन्म स्थली लमही में एक कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस विशेष अवसर पर संत अतुलानंद स्कूल के बच्चों ने उनकी कालजयी कहानी 'पंच परमेश्वर' का मंचन किया। बच्चों ने अपनी प्रस्तुति से दर्शकों का मन मोह लिया। यह आयोजन प्रेमचंद के साहित्यिक योगदान को याद करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था। 'पंच परमेश्वर' कहानी न्याय और नैतिकता के मूल्यों पर आधारित है। बच्चों ने कहानी के मुख्य संदेश को प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। साहित्यिक विरासत का स्मरण प्रेमचंद को हिंदी साहित्य का युग प्रवर्तक माना जाता है। उनकी कहानियों और उपन्यासों में ग्रामीण जीवन, किसानों की दुर्दशा और सामाजिक कुरीतियों का सजीव चित्रण मिलता है। उनकी रचनाएं आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी उनके समय में थीं। यह उत्सव उनकी साहित्यिक विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। प्रेमचंद का साहित्य समाज को जागरूक करने का संदेश देता है।