बाबा की दुलारी बेटी, जानकी बेटी है... के साथ ही अबटन ना लगउनी, इनकर बहिन महतरिया..., पाहुन सलोने सुंदर श्याम, हो रघुनंदन प्यारे...के गीतों से दीक्षांत मंडप का प्रांगण गूंज उठा। बक्सर से आई सिया दीदी की अगुवाई में महिलाओं ने मिथिला के पारंपरिक गीतों की एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां दीं। उन्होंने जब से आए हैं रघुबर सरकार मिथिला...गुनगुनाया तो पंडाल में मौजूद श्रोता भी सुर से सुर मिलाने लगे। श्री सीताराम विवाह महोत्सव के 55वें श्री सिय पिय मिलन महा-महोत्सव के दूसरे दिन की शुरुआत मिथिला के पारंपरिक गीतों से हुई। जगतगंज स्थित संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय के दीक्षांत मैदान में स्थापित श्रीहनुमान मंदिर में श्रीरामचरितमानस नवाह्न परायण के दूसरे दिन बालकांड की चौपाइयां गूंजती रहीं। मानस पाठ में प्रताप भानू की कथा का गान हुआ। वहीं अखंड कीर्तन भी भजन मंडलियों द्वारा चलता रहा। जय विजय लीला के अंतर्गत भगवान के अवतार प्रयोजन की लीला का मंचन हुआ।