जगत के पालनहार श्री हरि विष्णु जी के चरणों से प्रकट हुई व मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम द्वारा पूजी गई सदानीर मां गंगा को मैला न करने का संदेश देकर नमामि गंगे ने रविवार को रामनवमी के अवसर पर काशी के पौराणिक अति प्राचीन रामघाट पर भगवान श्री रामचंद्र जी की आरती उतारी । भारतीय सनातनी संस्कृति के अति महत्वपूर्ण अवसर पर काशी के रामघाट का गंगा किनारा स्वच्छता की गमक से चमक उठा। श्री राम की गंगा के संरक्षण की अपील करते हुए नमामि गंगे ने रामघाट के गंगा तट की सफाई की। पौराणिक रामघाट पर सफाई के लिए लोगों को जागरूक किया गया। प्रभु श्री राम के भजनों की गूंज चहुंओर सुनाई पड़ी। प्रातःकाल सूर्योदय के साथ ही स्वच्छता अभियान चला। रामघाट पर इधर-उधर बिखरी गंदगी को टोकरी में समेट कर नगर निगम के कूड़ेदान तक पहुंचाया गया। नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक राजेश शुक्ला ने कहा कि स्वयं भगवान श्रीराम व माता सीता ने चौदह वर्षों तक वन में रहकर प्रकृति को प्रदूषण से बचाने का संदेश दिया। ऋषि-मुनियों के हवन-यज्ञ के जरिए निकलने वाले ऑक्सीजन को अवरोध पहुंचाने वाले दैत्यों का वध करके प्रकृति की रक्षा की। आज देश एवं दुनिया में पर्यावरण प्रदूषण एवं जलवायु परिवर्तन ऐसी समस्याएं हैं जिनका समाधान श्रीराम के प्रकृति प्रेम एवं पर्यावरण संरक्षण की शिक्षाओं से मिलता है। हर व्यक्ति को श्रीराम के आदर्शों को अपने जीवन में उतारना होगा, स्वयं को श्रीराममय एवं प्रकृतिमय बनाना होगा, तभी प्रभु श्रीराम का जन्मोत्सव रामनवमी मनाना सार्थक होगा। आयोजन में प्रमुख रूप से नमामि गंगे काशी क्षेत्र के संयोजक व नगर निगम के स्वच्छता ब्रांड एम्बेसडर राजेश शुक्ला, रितेश दुबे, अश्वनी कुमार,अमन यादव , अनुराग यादव, अचिंत यादव , किशन यादव आशीष आदि शामिल रहे।