राजघाट का किनारा और हंसराज रघुवंशी की सूफियाना आवाज। हर चाहने वाला अपने पसंदीदा गायक के हर लय और ताल से ताल मिला रहा था। हंसराज ने राजराजेश्वर शिव की नगरी काशी को जब मेरा भोला है भंडारी, करे नंदी की सवारी...सुनाया तो गंगा की लहरें भी झंकृत हो उठीं। काशी गंगा महोत्सव के चौथे दिन को हंसराज रघुवंशी ने यादगार बना दिया।