बनारस के मैदागिन स्थित अपने 150 वर्ष पुराने मकान में रहकर डॉ. मालविका तिवारी हजारों वर्ष पुरानी काशी की नई कहानी अपने किताबों में गढ़ रही हैं। लेखन की विधा में आने से पहले वे काशी की सांस्कृतिक और साहित्यिक कला से रम चुकी थी। पांच वर्ष की उम्र में ही वे नृत्य करने लग गई थीं।