श्री काशी विश्वनाथ धाम के लोकार्पण के तीसरे वर्ष के महोत्सव का रंगारंग समापन हुआ। शाम को सांस्कृतिक संध्या में कलाकारों ने सुरों से भगवान शिव का अभिषेक किया। शिवार्चनम सांस्कृतिक संध्या में श्रद्धालुओं ने भी देर रात तक सांस्कृतिक आयोजन का लुत्फ उठाया और गीत संगीत पर झूमते नजर आए। शुक्रवार की शाम को गायन की शुरूआत बॉलीवुड के प्रसिद्ध गायक अभिजीत घोषाल ने प्रभु प्राणनाथं विभुं विश्वनाथं जगन्नाथ नाथं...से की। मुक्ताकाशीय मंच पर सजी संगीत की महफिल में एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां हुईं। अभिजीत ने वक्रतुंडाय...से गणेश जी की स्तुति की। इसके बाद मैं भिक्षुक हूं तुम दाता हो संबंध बताने आया हूं भोलेनाथ तुम्हारे चरणों में मैं तुम्हें रिझाने आया हूं...की प्रस्तुति से भगवान के चरणों में नमन किया। इसके बाद उन्होंने धाम से मां गंगा की आराधना करते हुए हर-हर गंगे, अमृत है गंगा का पानी, मुक्ति है गंगाधार...सुनाया। इसके बाद राग भोपाली में ऊं नम: शिवाय की भावपूर्ण प्रस्तुति से पूरे माहौल में भक्ति का संचार किया। रुद्राष्टकम के साथ ही शिव तांडव स्तोत्र का पाठ भी श्रोताओं को आनंद से भर गया। इसके बाद बनारस घराने के पं. देवब्रत मिश्र ने मंच संभाला और सितारवादन की प्रस्तुति दी। अंतिम प्रस्तुति लेकर मंच पर पहुंचे गायक नीरज सिंह ने भजनों की प्रस्तुति से समां बांध दिया। नीरज ने अंतिम प्रस्तुति में मां अन्नपूर्णा, भैरव बाबा रहा ना कोई बाकी, बम-बम बोल रहा है काशी...के जरिए दर्शकों के साथ ही शिवभक्तों को झूमने पर विवश कर दिया। इस दौरान मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्वभूषण मिश्र, स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती, न्यास सदस्य पं. दीपक मालवीय, प्रो. ब्रजभूषण ओझा मौजूद रहे।