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दालमंडी से औरंगाबाद शिफ्ट चीनी मांझे का कारोबार,1200 में मिल रहा; VIDEO

बनारस की सड़कों पर चल रहे लोगों के सिर पर कातिल चीनी मांझा उड़ रहा है। जिसकी जद में आते ही गर्दन, चेहरा, उंगलियां कट सकती हैं... जिला प्रशासन की ओर से चीनी मांझे की बिक्री पर रोक लगाने और बेचने वालों के खिलाफ जेल भेजने जैसी कार्रवाई करने के बाद भी धड़ल्ले से कारोबार हो रहा है। बस जगह और बेचने का तरीका बदल गया है। पहले दालमंडी और अब ये औरंगाबाद के इलाके में शिफ्ट हो गया है। दालमंडी में चल रहे ध्वस्तीकरण के कारण मांझा बेचने वाले औरंगाबाद के अलावा शहर के अलग- अलग इलाकों में ठिकाना बना चुके हैं। पतंग की दुकान चलाने वाले चोरी-छिपे कातिल चीनी मांझा बेच रहे हैं। इसी का नतीजा है कि आसमान में उड़ रही पतंगों के पीछे अब भी चीनी मांझा काल बनकर मंडरा रहा है। हकीकत जानने सोमवार को अमर उजाला की टीम शहर में निकली, पता चला कि अब इस मांझे को बेचने वाले पुराना पैतरा छोड़ नए तरीके से काम कर रहे हैं। कातिल मांझा बेचने वाले पुलिस के डर से स्थानीय पतंगबाजों को मांझा नहीं बेच रहे हैं। दुकानों पर पतंग, सद्दी, देसी मांझा रख कर चोरी से चीनी मांझा की मार्केटिंग की जा रही है। औरंगाबाद, लल्लापुरा, बजरडीहा, खोजवा और लोहता में दुकानों पर पतंगबाजों की भीड़ है। अमर उजाला की टीम पहुंची तो पता चला कि यहां चोरी-छिपे कातिल मांझा बिक रहा है। दुकानदारों ने आसपास गोदाम बना रखा है।

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