फर्जी धर्माचार्यों के बहिष्कार को लेकर अखाड़ा परिषद के निर्णय का अखिल भारतीय संत समिति ने भी स्वागत किया है। समिति के राष्ट्रीय महामंत्री स्वामी जीतेंद्रानंद सरस्वती ने कहा कि यह जिम्मेदारी भी अखाड़ों की होनी चाहिए कि कौन धर्माचार्य या स्वयभू भगवान बना फिर रहा है।